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Cyber Crime / फर्जी ई-चालान मैसेज से रहें सतर्क, साइबर सैल ने जारी की एडवाइजरी; जानें कैसे करें बचाव

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 12 Jul 2026 • 1 Min Read

Cyber Crime : डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर अपराधी फर्जी ई-चालान संदेश भेजकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। साइबर सैल ने लोगों से केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही ई-चालान की जांच करने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी है।

शिमला

फर्जी ई-चालान के जरिए लोगों को बनाया जा रहा निशाना

साइबर अपराधी अब फर्जी ई-चालान संदेशों के माध्यम से लोगों की बैंकिंग जानकारी और निजी डेटा हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। साइबर सैल शिमला के अनुसार ठग ऐसे एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल भेज रहे हैं, जो देखने में बिल्कुल वास्तविक ई-चालान जैसे प्रतीत होते हैं। इन संदेशों में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ता को नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जहां वाहन विवरण, मोबाइल नंबर, बैंकिंग जानकारी या अन्य व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद साइबर अपराधी इन जानकारियों का दुरुपयोग कर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

क्या है असली ई-चालान और कैसे करें पहचान

ई-चालान प्रणाली भारत सरकार की आधिकारिक डिजिटल व्यवस्था है, जिसके माध्यम से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर ऑनलाइन चालान जारी किए जाते हैं। साइबर सैल ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक ई-चालान प्रक्रिया में कभी भी ओटीपी, डेबिट या क्रेडिट कार्ड विवरण, यूपीआई पिन अथवा इंटरनेट बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी नहीं मांगी जाती। यदि किसी संदेश में तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाया जाए, भाषा में त्रुटियां हों या वेबसाइट का पता आधिकारिक पोर्टल से अलग दिखाई दे, तो उसे संदिग्ध मानकर उससे दूरी बनाए रखें।

केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही करें सत्यापन

साइबर सैल ने लोगों से अपील की है कि वाहन का ई-चालान स्टेटस केवल भारत सरकार के आधिकारिक ई-चालान पोर्टल https://echallan.parivahan.gov.in अथवा संबंधित राज्य की ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर ही जांचें। किसी भी अनजान एसएमएस, व्हाट्सऐप या ई-मेल में प्राप्त लिंक पर बिना सत्यापन क्लिक न करें। यदि वेबसाइट के यूआरएल में स्पेलिंग का अंतर दिखाई दे या वह सरकारी डोमेन से अलग हो, तो उसे तुरंत बंद कर दें।

साइबर सैल ने दिए सुरक्षा संबंधी सुझाव

एडवाइजरी में नागरिकों को मोबाइल फोन में विश्वसनीय एंटी-वायरस या सुरक्षा एप्लीकेशन का उपयोग करने की सलाह दी गई है, ताकि फिशिंग वेबसाइटों और संदिग्ध लिंक को ब्लॉक किया जा सके। किसी भी संदिग्ध संदेश की स्थिति में संबंधित विभाग से पुष्टि करें और यदि साइबर ठगी का शिकार हो जाएं तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, सतर्कता और केवल आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग ही ऐसे साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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