कांगड़ा के डल लेक स्थित दुर्बेश्वर महादेव मंदिर में 1 जून से महाआरती, सौंदर्यीकरण योजना भी प्रस्तावित
Himachalnow / धर्मशाला
कांगड़ा के डल लेक स्थित दुर्बेश्वर महादेव मंदिर में 1 जून से प्रतिदिन महाआरती आयोजित करने की योजना घोषित की गई है, जिसके तहत मंदिर परिसर में नियमित धार्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही डल झील के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण को लेकर भी कार्य प्रस्तावित हैं।
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मंदिर में महाआरती आयोजन की योजना
उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने श्री दुर्बेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान जानकारी दी कि 1 जून से मंदिर परिसर में प्रतिदिन महाआरती आयोजित की जाएगी। यह आयोजन नियमित रूप से निर्धारित समय के अनुसार किया जाएगा, जिससे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य मंदिर में चल रही पारंपरिक पूजा व्यवस्था को नियमित रूप से संचालित करना और आगंतुकों के लिए एक निश्चित धार्मिक कार्यक्रम उपलब्ध कराना है।
डल झील के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर कार्य
उन्होंने बताया कि डल झील के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा। इस योजना के तहत झील के जलस्तर, संरचनात्मक स्थिति और आसपास के क्षेत्र के विकास से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही झील क्षेत्र में आने वाले लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने, स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने और क्षेत्र को व्यवस्थित रूप देने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
सरकारी योजनाओं के तहत विकास कार्य
उप मुख्य सचेतक ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से मंदिर परिसरों में सुविधाओं का विस्तार, व्यवस्थाओं का सुदृढ़ीकरण और पारंपरिक संरचनाओं के संरक्षण पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यों से क्षेत्रीय स्तर पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
स्वीकृति और प्रशासनिक उपस्थिति
उन्होंने डल झील के जीर्णोद्धार के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने की जानकारी दी और संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कही। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों, मंदिर समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों की उपस्थिति रही, जहां कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं और प्रस्तावित कार्यों को लेकर चर्चा की गई।
