43 साल पुरानी डायरी में कैद है बदलते समाज की कहानी, विश्व वृक्ष दिवस पर लोकार्पित हुई डॉ. दीनदयाल वर्मा की नई पुस्तक
विश्व वृक्ष दिवस के अवसर पर नाहन में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दीनदयाल वर्मा की 17वीं पुस्तक ‘डायरी के पन्ने 1983’ का लोकार्पण किया गया। 43 वर्ष पुरानी डायरी पर आधारित यह पुस्तक हिमाचल के जंगलों, नाहन की संस्कृति और वर्ष 1983 से 2026 तक के सामाजिक, पर्यावरणीय व मानवीय बदलावों का संवेदनशील दस्तावेज प्रस्तुत करती है।
नाहन
हिमाचल के जंगलों की खुशबू, पहाड़ों की संवेदनाएं और नाहन शहर की बदलती तस्वीर को वर्षों से अपनी लेखनी में सहेज रहे वन विभाग से सेवानिवृत्त वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दीनदयाल वर्मा की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘डायरी के पन्ने 1983’ का विश्व वृक्ष दिवस के अवसर पर नाहन में लोकार्पण किया गया। यह डॉ. वर्मा की 17वीं पुस्तक है, जो सामाजिक सरोकारों, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम पर आधारित है।पुस्तक का विमोचन फ्रेंड्स ऑफ फॉरेस्ट्स, जिला सिरमौर के जिला अध्यक्ष, पूर्व वन मंडल अधिकारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि डॉ. दीनदयाल वर्मा का साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक सतत मुहिम है। उनकी प्रत्येक रचना समाज को जंगल, जल और जमीन के संरक्षण का संदेश देती है।
43 साल पुरानी डायरी बनी आज के समाज का आईना
‘डायरी के पन्ने 1983’ केवल संस्मरण नहीं है, बल्कि वर्ष 1983 से वर्ष 2026 तक के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय बदलावों का जीवंत दस्तावेज है। पुस्तक में खेती-किसानी, ग्रामीण जीवन, पारिवारिक रिश्तों, प्रकृति और मानवीय मूल्यों में आए परिवर्तनों को लेखक ने अपने अनुभवों और सूक्ष्म अवलोकन के साथ दर्ज किया है। यह पुस्तक पाठकों को अतीत की यात्रा कराते हुए वर्तमान का आत्ममंथन करने के लिए भी प्रेरित करती है।
जंगलों से शुरू हुआ सफर, लेखनी तक पहुंची प्रकृति की आवाज
वन विभाग में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले डॉ. दीनदयाल वर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान हिमाचल के जंगलों और प्राकृतिक विरासत को नजदीक से देखा। यही अनुभव उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी ताकत बने। उनकी अधिकांश पुस्तकों में हिमाचल के वन, लोकजीवन, प्रकृति और विशेष रूप से नाहन शहर की संस्कृति और संवेदनाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। यही कारण है कि उन्हें पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों का संवेदनशील साहित्यकार माना जाता है।
इस अवसर पर रश्मि प्रकाशन, नाहन की प्रबंध निदेशक मीरा वर्मा, नगर परिषद पार्षद मोना तोमर, रोड सेफ्टी क्लब के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर विशाल सिंह तोमर, समाजसेवी नीलम शर्मा, युवा समाजसेवी संजय पुंडीर, राहुल सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, पर्यावरणविद् और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में विश्व वृक्ष दिवस के उपलक्ष्य में सभी ने अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने का संकल्प लिया। उपस्थित लोगों ने डॉ. दीनदयाल वर्मा की नई पुस्तक को हिमाचल की सामाजिक स्मृतियों और पर्यावरण चेतना को संजोने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।