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डिजिटल अरेस्ट का कोई कानूनी प्रावधान नहीं, वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी के नाम पर ठगी से रहें सतर्क

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

नाहन, 8 अक्टूबर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सिरमौर की ओर से नाहन कोर्ट स्टाफ के लिए साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट को लेकर विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में डीएलएसए सिरमौर के सचिव नव कमल विशेष रूप से मौजूद रहे।

नाहन

पुलिस विभाग से पहुंचे साइबर अपराध विशेषज्ञों ने कोर्ट स्टाफ को साइबर ठगी के बदलते तरीकों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और गिरफ्तारी का डर दिखाकर लोगों से पैसे ऐंठते हैं। ऐसे मामलों में अपराधी पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर बनाए रखते हुए मानसिक दबाव बनाने का प्रयास करते हैं।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया भारत में नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती। ऐसे किसी भी कॉल से घबराने के बजाय तत्काल इसकी सूचना संबंधित एजेंसी को देने की सलाह दी गई।

शिविर में कर्मचारियों को बैंक खाता, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य निजी जानकारी अनजान लोगों के साथ साझा नहीं करने के लिए जागरूक किया गया। साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी गई।

डीएलएसए सचिव नव कमल ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे अपराधों से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता जरूरी है। उन्होंने कोर्ट स्टाफ से शिविर में मिली जानकारी को अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों तक पहुंचाने का आग्रह किया।

शिविर के अंत में कोर्ट स्टाफ ने साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे, जिनका पुलिस विभाग के विशेषज्ञों ने समाधान किया।

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