सिख पंथ के बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर, इतिहास सदैव करेगा नमन : डॉ. सिकंदर कुमार
डॉ. सिकंदर कुमार ने गुरुद्वारा श्री भगत नामदेव जी, मिडिल बाजार में आयोजित गुरमत समागम के दौरान सिख पंथ के बलिदानों, सेवा और मानवता की परंपरा को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने गुरु साहिब की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए गुरुद्वारे के लिए सोलर लाइट उपलब्ध कराने की घोषणा की। समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं संगत का आभार व्यक्त किया।
शिमला
भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सिख पंथ ने केवल अपने धर्म की ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र, संस्कृति, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिए हैं। इन बलिदानों की गौरवगाथा भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है, जिसे देश सदैव श्रद्धा के साथ स्मरण करेगा।डॉ. सिकंदर कुमार मिडिल बाजार स्थित गुरुद्वारा श्री भगत नामदेव जी में आयोजित महान गुरमत समागम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन गुरमीत सिंह, सदस्य नौफल संस्थान द्वारा किया गया।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, इसलिए उन्हें “हिंद दी चादर” के नाम से जाना जाता है। उनका बलिदान किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय के धार्मिक अधिकारों और मानव गरिमा की रक्षा के लिए था।डॉ. सिकंदर कुमार ने चार साहिबज़ादों के अद्वितीय बलिदान को याद करते हुए कहा कि बड़े साहिबज़ादे बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह जी ने चमकौर साहिब के युद्ध में वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहादत प्राप्त की, जबकि छोटे साहिबज़ादे बाबा ज़ोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी ने कम आयु में भी धर्म से समझौता करने से इनकार करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका बलिदान आज भी साहस, आस्था और राष्ट्रभक्ति की मिसाल है।
उन्होंने कहा कि सिख इतिहास केवल शौर्य और बलिदान का इतिहास नहीं, बल्कि सेवा, समानता और मानवता की मिसाल भी है। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष कर समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने का कार्य किया और सिख परंपरा सदैव राष्ट्रहित में अग्रणी रही है।
इस अवसर पर सांसद ने गुरुद्वारा श्री भगत नामदेव जी, मिडिल बाजार के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा एवं ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोलर लाइट उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह सेवा श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सार्थक कदम साबित होगी।
उन्होंने संगत से गुरु साहिब की शिक्षाओं—सेवा, समर्पण, समानता, मानवता और “सरबत दा भला”—को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इन्हीं आदर्शों पर चलकर एक सशक्त, समरस और विकसित भारत का निर्माण किया जा सकता है।समागम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरबाणी कीर्तन का श्रवण किया और गुरु का लंगर ग्रहण किया। अंत में आयोजक गुरमीत सिंह ने सभी अतिथियों और संगत का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया।
