सोलन के डलीप स्कूल में नशा जागरूकता शिविर, विद्यार्थियों को दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सोलन द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत डलीप गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की गई।
सोलन
नशा जागरूकता शिविर का आयोजन
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, सोलन के सौजन्य से 23 जून 2026 को डलीप गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोलन में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निषेध दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य प्रतिभागियों को नशे के दुष्प्रभावों, उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं तथा बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देना था।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने किया संबोधित
मुख्य चिकित्साधिकारी सोलन डॉ. अजय पाठक ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों, अध्यापकों और अन्य प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए नशे के बढ़ते प्रचलन, उसके कारणों और उससे होने वाले प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशे की आदत व्यक्ति के दैनिक जीवन, अध्ययन, कार्यक्षमता और पारिवारिक संबंधों पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। उन्होंने युवाओं से ऐसे मामलों में सतर्क रहने और समय रहते सही निर्णय लेने की अपील की।
स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी
डॉ. पाठक ने बताया कि तंबाकू, शराब एवं अन्य मादक पदार्थों के सेवन से फेफड़ों की बीमारियां, लीवर की क्षति, किडनी रोग, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, श्वसन संबंधी रोग तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि नशा केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि मानसिक स्थिति, व्यवहार, शिक्षा और सामाजिक जीवन पर भी असर डालता है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ दिनचर्या अपनाने, नियमित व्यायाम करने और नशे से दूर रहने की सलाह दी।
डिजिटल उपयोग पर भी किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से होने वाले प्रभावों पर भी चर्चा की गई। डॉ. पाठक ने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर आवश्यकता से अधिक समय बिताने से एकाग्रता में कमी, मानसिक तनाव और अध्ययन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को समय का संतुलित उपयोग करने, पढ़ाई के लिए निर्धारित समय रखने तथा खेल, पुस्तक अध्ययन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
नशामुक्त समाज के लिए जागरूकता पर जोर
मुख्य चिकित्साधिकारी ने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति के लिए परिवार, विद्यालय और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी नशा मुक्ति संबंधी जागरूकता गतिविधियों में सहयोग देने और अपने स्तर पर संदेश आगे बढ़ाने की बात कही। प्रतिभागियों को नशे से संबंधित जोखिमों की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेने के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन नशा मुक्त भारत अभियान के संदेश के साथ किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को स्वस्थ, अनुशासित और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। शिविर में दी गई जानकारी को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया गया और भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया गया।
