E-Governance / सेब खरीद से पशु रोगों की निगरानी तक डिजिटल तकनीक, धर्मशाला में देशभर के सफल मॉडल आए सामने
धर्मशाला में ई-गवर्नेंस सुधारों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन साइबर सुरक्षा, डिजिटल नवाचार और नागरिक-केंद्रित सुशासन पर व्यापक मंथन के साथ संपन्न हुआ। देशभर से पहुंचे वरिष्ठ प्रशासकों, नीति-निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग, क्वांटम-सुरक्षित वीपीएन, डेटा एनालिटिक्स से लेकर जमीनी स्तर पर सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की पहलों पर चर्चा की। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के सफल डिजिटल मॉडल साझा करने के साथ उन्हें दूसरे क्षेत्रों में अपनाने पर भी जोर दिया गया।
धर्मशाला
साइबर खतरों से निपटने के उपायों पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
ई-गवर्नेंस की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों, अनुकरण एवं डेटा एनालिटिक्स पर आयोजित सत्र में साइबर सुरक्षा से जुड़े आधुनिक उपाय प्रमुखता से चर्चा में रहे। इसरो अहमदाबाद के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के वैज्ञानिक रोहित त्यागी ने जोखिम से संबंधित खुफिया जानकारी के वितरण के लिए सुरक्षा उत्पाद और डीएनएस फिल्टरिंग सेवा के बारे में जानकारी साझा की।
बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक एवं समूह मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार ने मजबूत डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के लिए एकीकृत साइबर सुरक्षा ढांचे के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। रक्षा मंत्रालय के विभागाध्यक्ष कैप्टन रितेश वाही ने क्वांटम-सुरक्षित वीपीएन तकनीक और भविष्य में सुरक्षित डिजिटल संचार में इसकी उपयोगिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
पशु रोगों से सेब खरीद तक डिजिटल तकनीक के प्रयोग पर चर्चा
आईसीएआर-निवेदी बेंगलुरु के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के.पी. सुरेश ने राष्ट्रीय पशु रोग संदर्भ विशेषज्ञ प्रणाली पर प्रस्तुति दी। वहीं एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा ने हिमाचल में सेब खरीद के लिए मंडी मध्यस्थता योजना के डिजिटलीकरण और इसके माध्यम से पिछले कुछ वर्षों में हुई प्रगति की जानकारी दी।
इस सत्र का संचालन डिजिटल टेक्नोलॉजीज एवं गवर्नेंस के निदेशक तथा मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक अभिषेक वर्मा ने किया। अलग-अलग क्षेत्रों की इन पहलों के माध्यम से यह बताया गया कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक सीमित न रखकर कृषि, बागवानी, पशुपालन और वित्तीय सेवाओं तक किस तरह बढ़ाया जा सकता है।
पुणे-360 से संपूर्ण शिक्षा कवच तक साझा किए सफल मॉडल
ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार-राज्य, जिला एवं जमीनी स्तर की पहलें विषय पर आयोजित सत्र में देश के अलग-अलग हिस्सों में शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपनाए गए मॉडल प्रस्तुत किए गए। पुणे नगर निगम के सिस्टम मैनेजर राहुल जगताप ने पुणे-360 पहल की जानकारी दी।
झारखंड के लातेहार के उपायुक्त संदीप कुमार ने जिला प्रशासन की संपूर्ण शिक्षा कवच पहल के क्रियान्वयन के अनुभव साझा किए। रायपुर के मुख्य आयकर आयुक्त संजीव ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स यानी ओएनडीसी के लाभ और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। इस सत्र का संचालन पर्यटन सचिव एवं मंडलायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार ने किया।
सफल डिजिटल मॉडल दूसरे क्षेत्रों में भी अपनाने पर जोर
भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की निदेशक डॉ. तुषाबा शिंदे और अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव ने ई-गवर्नेंस सुधारों पर अपने विचार साझा करते हुए धर्मशाला में राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की।
समापन सत्र में प्रशासनिक सुधार सचिव ए. शैनामोल ने कहा कि सम्मेलन ने विभिन्न राज्यों में ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में हुए कार्यों, उपलब्धियों और अनुभवों से सीखने के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करवाया है। उन्होंने सफल पहलों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अन्य क्षेत्रों में अपनाने पर जोर दिया, ताकि उभरती प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान करने के साथ डिजिटल रूपांतरण की नई संभावनाएं तलाशी जा सकें।
दो दिवसीय सम्मेलन में विचारों और सफल मॉडलों के आदान-प्रदान के साथ इस बात पर विशेष मंथन हुआ कि तकनीक के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, कुशल, पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिकों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील कैसे बनाया जाए।