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E20 Petrol / भूटान E20 पेट्रोल दावों पर सरकार की सफाई, जानें पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या कहा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

E20 Petrol : भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने भूटान द्वारा E20 पेट्रोल से जुड़े प्रस्ताव को ठुकराने संबंधी मीडिया रिपोर्ट्स को गलत बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि तेल विपणन कंपनियों (OMC) की ओर से भूटान को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) निर्यात करने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव न तो भेजा गया था और न ही इस तरह की कोई प्रक्रिया विचाराधीन है।

भारत

मंत्रालय ने सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स पर स्थिति स्पष्ट की

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में स्पष्ट किया कि तेल विपणन कंपनियों (OMC) की ओर से भूटान को E20 पेट्रोल (एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) निर्यात करने का कोई भी आधिकारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इस विषय में जो भी दावे किए जा रहे हैं, वे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और इस तरह की जानकारी पर भरोसा करने से पहले केवल सरकारी और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि की जानी चाहिए। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में भूटान को इस प्रकार के किसी प्रस्ताव की कोई औपचारिक प्रक्रिया न तो शुरू की गई है और न ही विचाराधीन है।

भूटान से जुड़े प्रस्ताव संबंधी दावों को सरकार ने खारिज किया

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि भारत की ओर से भूटान को E20 पेट्रोल आपूर्ति का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे भूटान ने कथित तौर पर अस्वीकार कर दिया। इन रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख किया गया था कि भूटान ने ईंधन अवसंरचना की स्थिति और पहाड़ी क्षेत्रों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की उपयुक्तता को लेकर कुछ चिंताएं व्यक्त की थीं। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन सभी दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा है कि भारत सरकार या किसी भी OMC की ओर से इस प्रकार का कोई प्रस्ताव भूटान को नहीं भेजा गया था।

अन्य रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर भी सरकार का स्पष्टीकरण

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि भूटान ने भारत से सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखने का अनुरोध किया था और साथ ही यह आशंका जताई थी कि पुराने ईंधन भंडारण टैंकों में नमी के कारण ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, क्योंकि एथेनॉल मिश्रित ईंधन नमी को अवशोषित कर सकता है। मंत्रालय ने इन सभी दावों को भी आधिकारिक रूप से गलत बताया है और स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में न तो कोई प्रस्ताव भेजा गया था और न ही इस प्रकार की कोई चर्चा या प्रक्रिया सरकारी स्तर पर दर्ज है।