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हिमाचल सरकार ईको टूरिज्म नीति: स्थानीय रोजगार को अनिवार्य किया

हिमाचलनाउ डेस्क • 1 Dec 2024 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने ईको टूरिज्म नीति में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए स्थानीय लोगों को रोजगार देने और स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल करने को अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय प्रदेश सरकार ने हाल ही में लिया, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की बेहतरी के लिए है।


ईको टूरिज्म नीति में महत्वपूर्ण बदलाव

हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी ईको टूरिज्म नीति में संशोधन किया है, जिसे कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई थी। इस संशोधन के तहत स्थानीय लोगों को अनिवार्य रूप से रोजगार देना होगा और स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा, सरकार ने कुछ अन्य बदलाव भी किए हैं, जिनका उद्देश्य राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करना है।


6 प्रस्तावों को मंजूरी और नए दिशा-निर्देश

वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) 2023 के तहत, सरकार ने ईको टूरिज्म नीति में बदलाव किए हैं। इसके अंतर्गत 6 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अब ईको टूरिज्म साइट के लिए एक हेक्टेयर से अधिक के प्रोजेक्ट को भी अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, ट्रैकिंग गतिविधियां भी अब वन विभाग के अधीन प्रस्तावित की गई हैं।


नई ईको टूरिज्म नीति से स्थानीय समुदाय को लाभ

नई नीति के तहत, स्थानीय लोगों को रोजगार देना अब अनिवार्य हो गया है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। स्थानीय उत्पादों का उपयोग सुनिश्चित करके, राज्य सरकार स्थानीय व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा, ट्रैकिंग गतिविधियों को वन विभाग द्वारा नियंत्रित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण पर कम से कम दबाव पड़ेगा।


15 साल तक दी जाएगी ईको टूरिज्म साइट

ईको टूरिज्म साइट को 10 साल के लिए किसी फर्म या व्यक्ति को दिया जाएगा, जिसे 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है। कुल मिलाकर, एक ईको टूरिज्म साइट को अधिकतम 15 साल तक अनुमति दी जाएगी। इस दौरान, टैंड, लकड़ी के स्ट्रक्चर, और प्री-फैब्रिकेटेड भवन बनाए जाएंगे, जिनका डिजाइन इस तरह होगा कि वे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।


पर्यावरण संरक्षण पर जोर

नई नीति में यह सुनिश्चित किया गया है कि ईको टूरिज्म साइटों पर कोई भी प्राकृतिक छेड़छाड़ नहीं होगी। झीलों, नदियों, सैंचुरी और वेटलैंड्स को सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार का उद्देश्य यह है कि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता को सैलानियों के लिए सुरक्षित रखा जाए, जबकि स्थानीय समुदाय को भी इसके फायदे मिलें।


2030 तक ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने का लक्ष्य

2030 तक, राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कुल पर्यटकों का 10% हिस्सा ईको टूरिज्म स्थलों पर आए। यह कदम राज्य की पर्यटन नीति को नया दिशा देने के लिए लिया गया है, ताकि पर्यावरणीय संकट को ध्यान में रखते हुए, राज्य में सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सके।


हिमाचल प्रदेश की नई ईको टूरिज्म नीति न केवल राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि यह स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देगी। इसके तहत स्थानीय उत्पादों का उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण प्रमुख पहलू हैं, जो हिमाचल प्रदेश को एक सस्टेनेबल टूरिज्म हब बनाने में मदद करेंगे।