Loading...

देवदार के जंगलों पर ‘ईक्ट्रोपिस डियोडारे’ का हमला, राजगढ़ में 100 बीघा जंगल खतरे में

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 6 Hours Ago • 1 Min Read

राजगढ़ क्षेत्र के देवदार जंगलों में ‘ईक्ट्रोपिस डियोडारे’ नामक खतरनाक कीट के हमले से करीब 100 बीघा वन क्षेत्र प्रभावित हो गया है। पेड़ों की हरियाली तेजी से खत्म हो रही है और कई देवदार सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने पहली बार ड्रोन तकनीक से दवाई छिड़काव अभियान शुरू किया है।

राजगढ़

राजगढ़ वन मंडल के मानवा खन्यूड (नाड़ मेला) क्षेत्र में देवदार के घने जंगलों पर ‘ईक्ट्रोपिस डियोडारे’ नामक खतरनाक कीट के हमले ने हड़कंप मचा दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि करीब 100 बीघा से अधिक वन क्षेत्र इसकी चपेट में आ चुका है। जंगलों में बड़ी संख्या में देवदार के पेड़ तेजी से सूखने लगे हैं, जिससे वन विभाग से लेकर स्थानीय ग्रामीणों तक में चिंता बढ़ गई है।जंगलों में पेड़ों की शाखाओं और पत्तियों पर छोटे हरे रंग के कीट बड़ी मात्रा में दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर देवदार के पेड़ों की हरियाली पीली पड़ने लगी है, जबकि कुछ पेड़ पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो देवदार के विशाल जंगल तबाही की चपेट में आ सकते हैं।

वन विशेषज्ञों के अनुसार ‘ईक्ट्रोपिस डियोडारे’ देवदार प्रजाति के लिए बेहद नुकसानदायक कीट माना जाता है। यह पेड़ों की पत्तियों और नई कोपलों को तेजी से नष्ट करता है, जिससे पेड़ों की प्राकृतिक वृद्धि रुक जाती है। लगातार हमला होने पर पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगते हैं। मौसम में बदलाव, सूखा, नमी की कमी और बढ़ते तापमान को इस प्रकोप के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने भी मोर्चा संभाल लिया है। प्रभावित क्षेत्रों में विभागीय टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। खास बात यह है कि पहली बार इस तरह के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए ड्रोन तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।

राजगढ़ वन मंडल के डीएफओ समीर राज ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग को जैसे ही मामले की सूचना मिली, तुरंत टीमों को मौके पर भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि करीब 100 बीघा से अधिक जंगल इस कीट की चपेट में आया है। वहीं डॉ. वाईएस परमार नौणी विश्वविद्यालय से विशेषज्ञों की टीम भी क्षेत्र में पहुंच चुकी है और ड्रोन के माध्यम से प्रभावित पेड़ों पर दवाई का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके।देवदार हिमालयी क्षेत्रों की पहचान माने जाते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में इनकी बेहद अहम भूमिका होती है। ऐसे में देवदार के जंगलों पर मंडराता यह खतरा केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

Related Topics: