Election / हमीरपुर की री पंचायत के वार्ड-1 कंगरी में 288 मतदाताओं ने पंचायत चुनाव का बहिष्कार किया
Election : री पंचायत के वार्ड-1 कंगरी में पंचायत चुनाव के दौरान किसी भी मतदाता ने मतदान केंद्र पहुंचकर वोट नहीं डाला। ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, पेयजल और पंचायत मुख्यालय तक पहुंच संबंधी समस्याओं को लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें दोहराई हैं।
हमीरपुर
वार्ड-1 कंगरी में नहीं पड़ा एक भी वोट
जिला हमीरपुर की री पंचायत के वार्ड-1 कंगरी में पंचायत चुनाव के दौरान सभी 288 मतदाताओं ने मतदान प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार वार्ड में एक भी वोट दर्ज नहीं हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पहले ही पंचायत चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया था और इसे लेकर प्रशासन को भी अवगत कराया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण उन्होंने सामूहिक रूप से मतदान न करने का फैसला लिया। पंचायत चुनाव के दौरान मतदान केंद्र पर आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद रहीं, लेकिन पूरे दिन कोई भी मतदाता वोट डालने नहीं पहुंचा।
पंचायत मुख्यालय तक पहुंच को बताया मुख्य समस्या
ग्रामीणों के अनुसार कंगरी गांव री पंचायत के अंतर्गत आता है, लेकिन पंचायत मुख्यालय तक पहुंचने के लिए करीब 35 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। उनका कहना है कि सड़क सुविधा उपलब्ध न होने के कारण पंचायत कार्यालय तक नियमित रूप से पहुंचना कठिन है। ग्रामीणों ने बताया कि वाहन से आने-जाने में लगभग एक हजार रुपये तक खर्च हो जाता है, जबकि पैदल मार्ग जंगल क्षेत्र से होकर गुजरता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार बरसात और खराब मौसम के दौरान यह मार्ग और अधिक कठिन हो जाता है, जिससे प्रशासनिक कार्यों, प्रमाण पत्रों और अन्य पंचायत संबंधी सेवाओं के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मूलभूत सुविधाओं की कमी का उठाया मुद्दा
ग्रामीणों ने क्षेत्र में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि गांव में कई बार लगातार तीन से चार दिन तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रहती है। इसके अलावा पेयजल योजना तैयार होने के बावजूद उसे नियमित रूप से शुरू नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए उन्होंने अपनी निजी भूमि भी उपलब्ध करवाई थी, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों के अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन सुविधाओं की कमी के कारण गांव के लोगों को दैनिक कार्यों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
प्रशासन को भेजा गया था प्रस्ताव
ग्रामीणों के अनुसार 18 सितंबर 2024 को गांव की ओर से एक प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन को भेजा गया था। बाद में इस प्रस्ताव को शिमला भी प्रेषित किया गया। प्रस्ताव में मांग की गई थी कि गांव को नजदीकी पंचायत के साथ जोड़ा जाए अथवा अलग पंचायत का गठन किया जाए, ताकि लोगों को प्रशासनिक सेवाएं और पंचायत स्तर की सुविधाएं आसानी से मिल सकें। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्ताव भेजे जाने के बाद अब तक उन्हें किसी प्रकार की औपचारिक सूचना या कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष समस्याएं उठाई गईं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
भविष्य में भी बहिष्कार जारी रखने की बात कही
ग्रामीणों ने कहा कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में भी वे चुनाव प्रक्रिया से दूरी बनाए रख सकते हैं। उनका कहना है कि सड़क, बिजली, पेयजल और पंचायत मुख्यालय तक पहुंच जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए और पंचायत पुनर्गठन अथवा नजदीकी पंचायत से जोड़ने के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।