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Election / नाहन नगर परिषद चुनाव: सोलंकी की सक्रियता बनाम भाजपा की साख, 13 वार्डों में कांटे की टक्कर

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 7 Hours Ago • 1 Min Read

Election : पुराने कार्यकाल की छवि, नए चेहरों की चुनौती और बिंदल की रणनीति के बीच नाहन नगर परिषद चुनाव दिलचस्प मुकाबले में बदलता नजर आ रहा है। शहर के 13 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।

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नाहन नगर परिषद चुनाव इस बार सीधे तौर पर भाजपा के पिछले कार्यकाल की कार्यशैली और कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी की सक्रिय राजनीति के बीच मुकाबले में बदलता नजर आ रहा है। शहर के 13 वार्डों में चुनावी सरगर्मी चरम पर है और यह चुनाव केवल पार्षद चुनने तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा भी बन चुका है।

नगर परिषद में पिछले कार्यकाल के दौरान भाजपा समर्थित प्रतिनिधियों का दबदबा रहा, लेकिन इस दौरान कई पार्षदों पर निष्क्रिय रहने के आरोप लगते रहे। शहर के कई वार्डों में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और जनसमस्याओं के समाधान में देरी को लेकर लोगों में नाराजगी भी चर्चा का विषय बनी रही। अब यही मुद्दा चुनावी मैदान में भाजपा समर्थित नए चेहरों के सामने चुनौती बनता दिख रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा को इस बार केवल कांग्रेस से ही नहीं, बल्कि अपने पिछले कार्यकाल की छवि से भी मुकाबला करना पड़ रहा है। कई वार्डों में मतदाता पुराने पार्षदों की कार्यशैली को लेकर खुलकर चर्चा कर रहे हैं, जिसका असर नए उम्मीदवारों पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।

दूसरी ओर कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी इस चुनाव में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। अस्वस्थता और पीजीआई में उपचार के बावजूद उनका लगातार वार्ड-दर-वार्ड जाकर प्रचार करना कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के लिए बड़ा सहारा बना हुआ है। सोलंकी की सादगी, सहज पहुंच और व्यक्तिगत संपर्क को कांग्रेस इस चुनाव में अपनी बड़ी ताकत मान रही है।

हालांकि भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि नाहन पूर्व विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल का गृह क्षेत्र है। प्रदेश स्तर की व्यस्तताओं के चलते भले ही बिंदल स्थानीय स्तर पर सीमित समय दे पा रहे हों, लेकिन पार्टी अब भी उनके संगठनात्मक कौशल और चुनावी रणनीति पर भरोसा जता रही है। भाजपा बूथ मैनेजमेंट और मजबूत संगठन के दम पर चुनावी समीकरण साधने में जुटी हुई है।

इस बार दोनों दलों ने कई वार्डों में नए चेहरों पर दांव खेला है। कांग्रेस ने जनसंपर्क और साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवारों को आगे किया है, जबकि भाजपा ने एंटी इनकंबेंसी की धार कम करने के लिए कई पुराने चेहरों को बदलकर नए प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं।

फिलहाल नाहन की राजनीति में मुकाबला पूरी तरह रोचक और कांटे का बना हुआ है। एक तरफ भाजपा अपनी संगठनात्मक पकड़ और पुराने वोट बैंक के सहारे वापसी की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी की सक्रियता चुनाव को दिलचस्प मोड़ देती नजर आ रही है। अब देखना यह होगा कि शहर की जनता इस बार भरोसा किस पर जताती है।

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