लोकसभा से पास हुआ फाइनेंस बिल 2026, टैक्स सिस्टम को आसान और भरोसेमंद बनाने पर फोकस
लोकसभा ने बुधवार को वित्त विधेयक 2026 को पारित कर दिया। इस विधेयक में कुल 32 अहम संशोधन शामिल किए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसा टैक्स सिस्टम तैयार करना है, जो अत्यधिक जांच-पड़ताल के बजाय करदाताओं के भरोसे पर आधारित हो।
संसद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की आर्थिक नीतियां भरोसे, पारदर्शिता और स्पष्टता पर केंद्रित हैं। उनका कहना था कि भारत में आर्थिक सुधार किसी मजबूरी के तहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सोच और प्रतिबद्धता के साथ किए जा रहे हैं।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अल्पकालिक चुनौतियों के बजाय लंबे समय में आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए नीतियां बना रही है। टैक्स ढांचे को सरल बनाना और छोटे कारोबारियों तथा व्यक्तिगत करदाताओं को राहत देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार, भरोसे पर आधारित कर प्रणाली से स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा, विवाद कम होंगे और टैक्स व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
राज्यों को राजस्व आवंटन को लेकर उठे सवालों पर जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि राज्य-संबंधित योजनाओं पर केंद्र सरकार का खर्च उपकर और अधिभार से होने वाली आय से अधिक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
एमएसएमई सेक्टर को लेकर सरकार की नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उद्यम नीति के केंद्र में हैं। उन्होंने ‘पहले सुविधा, बाद में सख्ती’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए बताया कि पहले उद्यमों को सहायता दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर ही सख्ती बरती जाएगी।
इसके साथ ही, तकनीकी चूक जैसे ऑडिट न कराने पर लगने वाले जुर्माने को अब तय शुल्क में बदल दिया गया है, जिससे एमएसएमई को अनिश्चितता से राहत मिलने की उम्मीद है।