Loading...

वन अधिकार अधिनियम के तहत सिरमौर में 28 पात्र परिवारों को भूमि एवं अन्य अधिकारों का लाभ

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 2 Hours Ago • 1 Min Read

वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत जिला सिरमौर में 28 पात्र व्यक्तियों को भूमि एवं अन्य अधिकार प्रदान किए गए हैं। प्रशासन के अनुसार इस पहल का उद्देश्य पात्र वनवासी परिवारों को कानूनी अधिकार, आजीविका सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण उपलब्ध कराना है।

नाहन

वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान

प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिला सिरमौर में इस अधिनियम के तहत अब तक 28 पात्र व्यक्तियों को भूमि एवं अन्य वन अधिकार प्रदान किए जा चुके हैं। प्रशासन के अनुसार अधिनियम का उद्देश्य उन परिवारों को कानूनी मान्यता देना है जो लंबे समय से वन क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं या वन भूमि पर आजीविका आधारित गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वन अधिकारों की मान्यता मिलने से पात्र परिवारों को भूमि उपयोग, आवास और कृषि गतिविधियों के लिए स्पष्ट अधिकार प्राप्त होते हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन में स्थिरता आती है।

पात्र परिवारों को मिला कानूनी संरक्षण

वन अधिकार अधिनियम अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य परंपरागत वनवासियों को उनके पारंपरिक अधिकारों की कानूनी मान्यता प्रदान करने के लिए लागू किया गया है। इसके अंतर्गत पात्र परिवारों को वन भूमि पर व्यक्तिगत अथवा अन्य निर्धारित अधिकार उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रशासन का कहना है कि इस प्रक्रिया से ऐसे परिवारों को भूमि संबंधी अनिश्चितताओं से राहत मिलती है और उन्हें आजीविका के लिए दीर्घकालिक आधार प्राप्त होता है। साथ ही, भूमि अधिकार मिलने के बाद परिवार कृषि, बागवानी और अन्य ग्रामीण गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित कर सकते हैं।

लाभार्थियों ने साझा किए अनुभव

शिलाई के ग्राम कलोग निवासी गुलाब सिंह ने बताया कि उनका परिवार लगभग चार पीढ़ियों से संबंधित भूमि पर निवास कर रहा था, लेकिन भूमि का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होने के कारण भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिकार मिलने के बाद परिवार को भूमि पर वैधानिक मान्यता प्राप्त हुई है। उनके अनुसार इससे परिवार को अपनी कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी आधार तैयार करने में सुविधा मिलेगी।

चार बीघा भूमि का मिला अधिकार

शिलाई क्षेत्र की निवासी बिनता देवी ने बताया कि उनके परिवार के पास पहले अपनी भूमि नहीं थी, जिसके कारण आजीविका और भविष्य की योजनाओं को लेकर कई व्यावहारिक चुनौतियां थीं। वन अधिकार अधिनियम के तहत उन्हें चार बीघा भूमि का अधिकार प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि भूमि मिलने के बाद परिवार खेती-बाड़ी की गतिविधियों को विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उनके अनुसार इससे परिवार को कृषि आधारित आय के अवसर प्राप्त होंगे और भूमि का उपयोग दीर्घकालिक आजीविका के साधन के रूप में किया जा सकेगा।

परिवारों को मिला स्थायी आधार

ग्राम पंचायत नैनी धार के गांव कलोग की निवासी मस्तो वर्मा ने बताया कि भूमि अधिकार प्राप्त होने से परिवार को स्थायी आधार मिला है। उन्होंने कहा कि पहले भूमि स्वामित्व न होने के कारण भविष्य की योजनाओं को लेकर स्पष्टता नहीं थी, जबकि अब परिवार कृषि और अन्य आवश्यक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने की स्थिति में है। उनके अनुसार भूमि अधिकार मिलने से परिवार को दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का आधार प्राप्त हुआ है।

तीन पीढ़ियों बाद मिला भूमि अधिकार

शिलाई विकास खंड के निवासी तुलसी राम ने बताया कि उनके परिवार के पास कई वर्षों से अपनी भूमि नहीं थी। वन अधिकार अधिनियम के तहत उन्हें नौ बीघा भूमि का पट्टा प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिकार मिलने के बाद परिवार खेती-बाड़ी की गतिविधियों को विस्तार देने की योजना बना रहा है। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर भूमि का उपयोग आवासीय उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकेगा। उनके अनुसार इससे परिवार को भविष्य की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने का अवसर मिला है।

समावेशी विकास की दिशा में पहल

प्रशासन के अनुसार वन अधिकारों की मान्यता से लाभार्थी परिवारों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध हुई है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य पात्र व्यक्तियों और समुदायों तक अधिनियम के लाभ पहुंचाना है, जिसके लिए जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं तथा प्राप्त दावों के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष बल दिया जा रहा है। जिला सिरमौर में 28 पात्र व्यक्तियों को भूमि एवं अन्य अधिकार प्रदान किया जाना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रशासन का मानना है कि वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करने के साथ-साथ उनकी आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

Related Topics: