पूर्व डीजीपी संजय कुंडू मामले में हाईकोर्ट ने कार्यवाही समाप्त की, एसआईटी ने शिकायत को मनगढ़ंत बताया
शिमला में पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय कुंडू से संबंधित मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान के आधार पर शुरू की गई कार्यवाही समाप्त कर दी है। अदालत ने संबंधित मामले में दायर रिपोर्ट पर कानूनी आपत्ति दर्ज कराने की अनुमति भी प्रदान की है, जबकि एसआईटी जांच के निष्कर्षों का भी आदेश में उल्लेख किया गया है।
शिमला
हाईकोर्ट का आदेश
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय कुंडू के खिलाफ दर्ज शिकायत के आधार पर स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही समाप्त कर दी है। यह मामला पालमपुर के एक होटल कारोबारी द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित था। मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधवालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान संबंधित रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट पर विचार करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने संजय कुंडू को होटल कारोबारी निशांत शर्मा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द किए जाने संबंधी रिपोर्ट का कानूनी रूप से विरोध करने की अनुमति भी दी है।
मामले की पृष्ठभूमि
अदालत ने 28 अक्तूबर 2023 को होटल कारोबारी निशांत शर्मा द्वारा ई-मेल के माध्यम से भेजी गई शिकायत और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को दिए गए आवेदन के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन डीजीपी ने शिकायतकर्ता को धमकाने का प्रयास किया, जिसके बाद न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई थी। इन आरोपों को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने 10 नवंबर 2023 को राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
एसआईटी जांच के निष्कर्ष
सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। आदेश में कहा गया कि एसआईटी की जांच के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों से नहीं हुई। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायत न्यायिक प्रक्रिया का उपयोग कारोबारी विवाद से जुड़े संदर्भ में की गई थी। न्यायालय ने अपने आदेश में एसआईटी के निष्कर्षों का संज्ञान लेते हुए स्वत: संज्ञान की कार्यवाही समाप्त करने का निर्णय लिया।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
पूर्व डीजीपी संजय कुंडू का पक्ष था कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं था और शिकायत के माध्यम से उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। न्यायालय ने उन्हें प्राथमिकी रद्द किए जाने संबंधी रिपोर्ट के विरुद्ध उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने की अनुमति प्रदान की है। मामले से संबंधित आगे की कार्रवाई अब लागू कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
