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पूर्व SSP संजीव गांधी के कार्यकाल के खर्च पर सवाल, सरकारी आवास के 14.07 लाख के काम की जांच की मांग

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

शिमला के पूर्व एसएसपी संजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान सरकारी आवास और अन्य सरकारी भवनों पर करवाए गए कार्यों तथा उनके खर्च को लेकर सवाल उठे हैं। पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी की ओर से की गई शिकायत में सरकारी आवास पर कथित तौर पर बिना आवश्यक मंजूरी 14.07 लाख रुपये खर्च किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में इन कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड और स्वीकृतियों की जांच के साथ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। पूर्व एसएसपी ने आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखते हुए इन्हें सही नहीं बताया है।

शिमला

सरकारी आवास पर 14.07 लाख के काम पर उठे सवाल

मामले के केंद्र में शिमला स्थित वह सरकारी आवास है, जिसका इस्तेमाल संजीव गांधी एसएसपी के पद पर रहते हुए कर रहे थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस सरकारी आवास में विभिन्न कार्यों पर करीब 14.07 लाख रुपये खर्च किए गए और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई।

इसी खर्च को लेकर अब सवाल उठाए गए हैं कि सरकारी धन से करवाए गए कार्यों के लिए किस स्तर पर स्वीकृति ली गई थी और संबंधित रिकॉर्ड में इसकी क्या स्थिति है। शिकायत में पूरे मामले की विभागीय स्तर पर जांच की मांग की गई है।

कार्यों की मंजूरी और रिकॉर्ड को जांच के दायरे में लाने की मांग

शिकायत में सरकारी आवास पर करवाए गए कार्यों की प्रशासनिक एवं व्यय स्वीकृतियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की बात कही गई है। संबंधित कार्यों के रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने की मांग की गई है कि खर्च निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के अनुसार किया गया था या नहीं।

मामले में सरकारी आवास पर किए गए कार्यों और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर पूर्व एसएसपी के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है।

रामपुर और रोहड़ू के विश्राम गृहों पर खर्च का भी जिक्र

मामला केवल सरकारी आवास तक सीमित नहीं है। शिकायत में संजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान रामपुर और रोहड़ू के विश्राम गृहों में मरम्मत एवं अन्य कार्यों पर हुए खर्च का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन कार्यों पर करीब आठ लाख रुपये खर्च किए गए।

इसके साथ ही वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पुलिस भवनों और थानों में करवाए गए कार्यों तथा उनसे जुड़े खर्च के रिकॉर्ड का भी जिक्र किया गया है। शिकायत में इन कार्यों की स्वीकृति और खर्च से जुड़े दस्तावेजों की जांच किए जाने की मांग की गई है।

फरवरी 2026 में शिमला से हो चुका है तबादला

संजीव गांधी का फरवरी 2026 में शिमला के एसएसपी पद से तबादला हो चुका है और उन्हें पीटीसी डरोह में डीआईजी के पद पर तैनात किया गया। शिकायत में सरकारी आवास को लेकर भी मामला उठाया गया है और आरोप है कि तबादले के कई महीने बाद तक आवास खाली नहीं किया गया।

इसे लेकर एसडीएम शिमला शहरी को भी पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है। शिकायत में सरकारी आवास से संबंधित नियमों का हवाला देते हुए इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

विभागीय जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट करने की मांग

शिकायत में उठाए गए बिंदुओं का मुख्य आधार सरकारी कार्यों पर हुए खर्च, उनकी स्वीकृतियों और उपलब्ध रिकॉर्ड को बनाया गया है। विभागीय जांच के माध्यम से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि सरकारी आवास सहित अन्य स्थानों पर करवाए गए कार्य निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के अनुरूप थे या नहीं।

वहीं पूर्व एसएसपी संजीव गांधी की ओर से भी मामले पर पक्ष सामने आया है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सही नहीं बताया है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोप और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही खर्च एवं स्वीकृतियों को लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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