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गिरिपार के खेतों से निकल रहा ‘सफेद सोना’, किसानों के चेहरों पर लौटी रौनक

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

गिरिपार क्षेत्र में इस बार लहसुन की फसल किसानों के लिए राहत लेकर आई है, जहां मंडियों में 60 से 150 रुपये प्रति किलो तक भाव मिलने से किसानों में उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि असमय बारिश और तेज अंधड़ के कारण फसल का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ, लेकिन मजबूत बाजार मांग और बेहतर दामों ने किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद दी है।

राजगढ़

गिरिपार क्षेत्र के पहाड़ इन दिनों लहसुन की खुशबू से महक उठे हैं। खेतों में सुबह से शाम तक किसानों की चहल-पहल दिखाई दे रही है। कहीं महिलाएं लहसुन काटने में जुटी हैं तो कहीं किसान कड़कती धूप के बीच खुदाई कर फसल को मंडियों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। इस बार मंडियों में मिल रहे अच्छे दामों ने किसानों के चेहरों पर लंबे समय बाद संतोष और उम्मीद की मुस्कान लौटा दी है। शुक्रवार को सोलन और राजगढ़ मंडियों में लहसुन 60 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति किलो तक बिका, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद जगी है।

हालांकि इस सीजन में मौसम किसानों की सबसे बड़ी चिंता बना रहा। फसल करीब 15 दिन पहले तैयार हो चुकी थी, लेकिन लगातार बारिश और तेज अंधड़ ने खुदाई का काम रोक दिया। खेतों में अधिक नमी रहने से कई जगह लहसुन का रंग काला पड़ गया, जबकि आकार भी अपेक्षित स्तर का नहीं बन पाया। कृषि विभाग के अनुसार असमय बारिश के कारण करीब 20 प्रतिशत फसल प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में रोग लगने से भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।प्रगतिशील किसान सुरजीत सिंह, रविकांत, बलबीर और जयसिंह ने बताया कि मौसम की मार के बावजूद इस बार मंडियों में मिले अच्छे दामों ने राहत दी है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम साथ देता तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों कहीं बेहतर हो सकते थे। इसके बावजूद बाजार में मांग मजबूत रहने से किसानों को नुकसान की भरपाई की उम्मीद है।

गौरतलब है कि सिरमौर जिला प्रदेश में लहसुन उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। खासकर गिरिपार क्षेत्र का लहसुन अपनी गुणवत्ता, तीखे स्वाद और औषधीय गुणों के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है। यहां उत्पादित लहसुन की भारी मांग चेन्नई, कर्नाटक और महाराष्ट्र तक रहती है, जहां से इसे विदेशों तक निर्यात किया जाता है। आयुर्वेदिक दवाइयों में भी गिरिपार के लहसुन का बड़े स्तर पर उपयोग किया जाता है।कृषि विभाग के अनुसार गिरिपार क्षेत्र में चार हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर औसतन 70 हजार मीट्रिक टन लहसुन का उत्पादन होता है। क्षेत्र में सबसे अधिक पार्वती किस्म की खेती की जाती है, जबकि कई किसान कुल्लू से भी बीज मंगवाते हैं। अदरक की खेती में लगातार बढ़ रहे रोगों के बाद अब बड़ी संख्या में किसान लहसुन को बेहतर विकल्प मानकर इसकी खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

राजगढ़ मंडी के आढ़ती विनोद शर्मा ने बताया कि लहसुन का सीजन अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ चुका है। अच्छी क्वालिटी का लहसुन 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। हालांकि आने वाले दिनों में मंडियों में आवक बढ़ने के साथ कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव संभव है।कृषि उपनिदेशक ने जानकारी देते हुए बताया कि गिरिपार क्षेत्र के संगड़ाह, लाना चेता, रेणुका, नौहराधार, बोगधार, गंडूरी, चाढ़ना, भवाई, दीदग, दाहन, फागू, पझौता, करगानू, नेईनेटी और शरगांव सहित कई क्षेत्रों में बड़े स्तर पर लहसुन की खेती की जाती है। उन्होंने कहा कि यह फसल अब क्षेत्र के किसानों के लिए सबसे मजबूत नकदी फसल बनती जा रही है।

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