शुक्रवार मछली अवैध शिकारियों में मचा हड़कंम, मत्स्य संपदा को नुकसान पहुंचाने पर कार्रवाई शुरू, 27 किलोग्राम बारीक नेट बरामद
गोबिंद सागर जलाशय में अवैध मछली शिकार और प्रतिबंधित जालों के खिलाफ मत्स्य विभाग ने बड़ा अभियान चलाते हुए 27 किलोग्राम अंडर साइज गिल नेट बरामद किए हैं। उप-मंडल बंगाणा के लठियानी क्षेत्र में शुक्रवार सुबह मत्स्य अधिकारी सुरेंद्र पटियाल के नेतृत्व में विशेष गश्त के दौरान जलाशय के संवेदनशील इलाकों में जांच की गई।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
उप-मंडल बंगाणा के गोबिंद सागर जलाशय में अवैध मत्स्य शिकार और प्रतिबंधित जालों के इस्तेमाल के खिलाफ मत्स्य विभाग ने बड़ा अभियान चलाया। शुक्रवार सुबह विशेष गश्त के दौरान विभागीय टीम ने जलाशय के कई क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर 27 किलोग्राम अंडर साइज गिल नेट बरामद किए। विभाग ने मौके पर दो मामले भी दर्ज किए हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि गोबिंद सागर में मत्स्य संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। लठियानी क्षेत्र में गोबिंद सागर जलाशय की मत्स्य संपदा को सुरक्षित रखने और अवैध मछली शिकार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए मत्स्य विभाग ने शुक्रवार को तड़के विशेष गश्त अभियान चलाया।
अभियान सुबह करीब छह बजे मत्स्य अधिकारी लठियाणी सुरेंद्र पटियाल के नेतृत्व में शुरू किया गया। विभागीय टीम ने जलाशय के संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचकर किश्तियों, जालों और संचालित मत्स्य गतिविधियों की गहन जांच की। गश्त के दौरान विभाग की टीम ने गोबिंद सागर जलाशय के बीट नंबर-1 क्षेत्र में औचक निरीक्षण किया। यह क्षेत्र जलाशय के उद्गम स्थल लूनखर खड्ड से लेकर दाहिने तट पर गांव रायपुर और बाएं तट पर गांव कोहड़रा तक फैला हुआ है। निरीक्षण के दौरान टीम को कई स्थानों पर प्रतिबंधित और अंडर साइज गिल नेट इस्तेमाल किए जाने की सूचना मिली, जिसके बाद तलाशी अभियान तेज किया गया।
कार्रवाई के दौरान विभागीय टीम ने करीब 27 किलोग्राम अंडर साइज गिल नेट जब्त किए। विभाग के अनुसार इस प्रकार के जालों का उपयोग मत्स्य नियमों के खिलाफ है। क्योंकि इनसे छोटी मछलियां भी फंस जाती हैं। जिससे जलाशय की प्राकृतिक मत्स्य संपदा को गंभीर नुकसान पहुंचता है। विभाग ने बरामद जालों को कब्जे में लेकर नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। अभियान के दौरान अवैध मत्स्य गतिविधियों से जुड़े दो अलग-अलग मामले भी दर्ज किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों ने दोनों मामलों में जांच प्रक्रिया आरंभ कर दी है और संबंधित लोगों की पहचान की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे ताकि जलाशय में अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। गश्त अभियान में विभागीय कर्मचारियों ने जलाशय में संचालित किश्तियों और मछली पकड़ने के उपकरणों का भी निरीक्षण किया।
