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Government Decision: UPI से शेयर, IPO, म्यूचुअल फंड में लगाते हैं पैसे? जानें नए MDR रूल का क्या होगा असर

हिमाचलनाउ डेस्क • 4 Hours Ago • 1 Min Read

Government Decision: सरकार ने UPI भुगतान के लिए नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR फ्रेमवर्क जारी किया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। आम उपयोगकर्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा, लेकिन 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू होगा। शेयर, IPO, म्यूचुअल फंड और अन्य कैपिटल मार्केट भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत की अलग दर तय की गई है। इस शुल्क का भार ग्राहक पर अलग से डालने की अनुमति नहीं होगी।

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सरकार और NPCI की ओर से जारी फ्रेमवर्क में भुगतान की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग MDR दरें तय की गई हैं। सामान्य मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, जबकि कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI भुगतान के लिए यह दर 0.02 प्रतिशत रखी गई है। इसका अर्थ है कि दुकान पर की गई खरीदारी और शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश पर एक जैसी दर लागू नहीं होगी। यह व्यवस्था 2,000 रुपये से अधिक के संबंधित मर्चेंट भुगतान पर प्रभावी होगी।

कैपिटल मार्केट भुगतान पर कितना MDR

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े UPI भुगतान को कैपिटल मार्केट श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में MDR की दर 0.02 प्रतिशत होगी और इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन तय की गई है। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के निवेश पर MDR दो रुपये, 50,000 रुपये पर 10 रुपये और एक लाख रुपये के निवेश पर 20 रुपये बनेगा। बड़े लेनदेन में भी शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक ही सीमित रहेगा।

इस दायरे में UPI के माध्यम से म्यूचुअल फंड में निवेश, सिक्योरिटीज की खरीद के लिए भुगतान, स्टॉक ब्रोकर या डीलर को भेजी गई रकम और ब्रोकिंग से जुड़े फंड ट्रांसफर शामिल हो सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति UPI से 10,000 रुपये की सामान्य खरीदारी करता है तो उस भुगतान के लिए निर्धारित MDR दर 0.4 प्रतिशत होगी। वहीं इतनी ही राशि म्यूचुअल फंड या दूसरे कैपिटल मार्केट उत्पाद में लगाने पर 0.02 प्रतिशत की दर लागू होगी।

निवेशक से अलग शुल्क लेने की अनुमति नहीं

नया MDR फ्रेमवर्क मर्चेंट या संबंधित इंटरमीडियरी से शुल्क लेने के लिए बनाया गया है। ऐसे में UPI से शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर निवेशक के बैंक खाते से MDR के नाम पर अलग राशि काटे जाने का निष्कर्ष सही नहीं होगा। नियम के अनुसार इस लागत का भार ग्राहक पर अलग से डालने की अनुमति नहीं है। संबंधित ब्रोकर, म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म या अन्य इंटरमीडियरी को यह देखना होगा कि वह अपने स्तर पर इस शुल्क का प्रबंधन कैसे करता है।

UPI के जरिए हर महीने SIP करने वाले निवेशकों के मामले में 0.02 प्रतिशत की दर से बनने वाली राशि अपेक्षाकृत छोटी होगी। उदाहरण के लिए 10,000 रुपये की SIP या एकमुश्त निवेश पर MDR का हिसाब दो रुपये बनेगा। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह शुल्क सीधे उनसे लेने के बजाय मर्चेंट प्लेटफॉर्म के लिए निर्धारित किया गया है। संबंधित म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म या ब्रोकिंग ऐप इस लागत को किस प्रकार वहन करता है, वास्तविक असर उसी व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

ट्रेडर्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बदलाव

बार-बार फंड ट्रांसफर करने वाले ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए नया फ्रेमवर्क अधिक प्रासंगिक हो सकता है, क्योंकि उनके UPI लेनदेन की संख्या ज्यादा रहती है। NSE के प्रबंध निदेशक और CEO आशीष कुमार चौहान ने अल्पावधि में UPI के जरिए होने वाले ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर पड़ने की संभावना जताई है। उनके अनुसार समय के साथ यह प्रभाव स्थिर हो सकता है। निवेशकों के लिए मुख्य बात यह है कि MDR सीधे नया ग्राहक शुल्क नहीं है और इसकी लागत संबंधित प्लेटफॉर्म या इंटरमीडियरी को वहन करनी होगी।

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