Loading...

51 शक्तिपीठ भारत की आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के सशक्त प्रतीकः राज्यपाल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने 51 शक्तिपीठों को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उनके वैज्ञानिक अध्ययन, डिजिटल प्रलेखन और वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवा शोधार्थियों से भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत साहित्य और शक्ति परम्परा पर गहन शोध करने का भी आह्वान किया।

कटरा

‘शक्तिमीमांसा’ राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, कटरा में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘शक्तिमीमांसा’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। ‘51 शक्तिपीठ : भारतीय विरासत के आध्यात्मिक स्तंभ’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर, जम्मू तथा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 51 शक्तिपीठ केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।

वैज्ञानिक अध्ययन और डिजिटल प्रलेखन पर दिया जोर

राज्यपाल ने कहा कि शक्तिपीठों के इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं का वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से डिजिटल प्रलेखन समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे जुड़ी परम्पराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को भी संरक्षित एवं प्रलेखित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने शक्तिपीठों के वैश्विक स्तर पर व्यवस्थित प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर भी बल दिया।

भारतीय ज्ञान परम्परा और शक्ति दर्शन पर विचार

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय दर्शन में शक्ति को सृष्टि की मूल प्रेरक ऊर्जा के रूप में माना गया है तथा यह सृजन, ज्ञान, करुणा, साहस और राष्ट्रचेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शक्तिपीठ सदियों से भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते आए हैं और ये भारतीय कला, स्थापत्य, साहित्य, संगीत तथा लोक परम्पराओं के महत्वपूर्ण केंद्र भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व भारतीय ज्ञान परम्परा, योग, आयुर्वेद और अध्यात्म की ओर आकर्षित हो रहा है तथा भारतीय शक्ति साधना नारी सम्मान, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सार्वभौमिक कल्याण का संदेश देती है।

युवा शोधार्थियों से शोध कार्य बढ़ाने का आह्वान

राज्यपाल ने युवा शोधार्थियों से संस्कृत साहित्य, शक्ति परम्परा, तंत्र दर्शन और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर गंभीर शोध करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल कर नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संगोष्ठी के दौरान होने वाले शोध और विचार-विमर्श भारतीय शक्ति परम्परा के संरक्षण, संवर्धन तथा वैश्विक स्तर पर उसके अध्ययन को नई दिशा प्रदान करेंगे।