हिमाचल हाईकोर्ट ने आशा वर्करों को चुनाव लड़ने से रोकने वाले फैसले पर लगाई अंतरिम रोक
Himachalnow / शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्करों को पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 1 जून को निर्धारित की है।
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हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आशा वर्करों को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने संबंधी राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने रीना देवी और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 जून को निर्धारित की है। याचिका में राज्य सरकार द्वारा जारी उस स्पष्टीकरण को चुनौती दी गई थी, जिसमें आशा वर्करों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना गया था।
याचिकाकर्ताओं ने फैसले को दी चुनौती
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि आशा वर्कर नियमित सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आती हैं, इसलिए उन्हें पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता। याचिका में कहा गया कि 2 मई 2026 को जारी संचार और स्पष्टीकरण के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं को निश्चित मासिक मानदेय और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन पर कार्यरत बताते हुए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे अंशकालिक आधार पर सेवाएं देती हैं और उनकी नियुक्ति नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह नहीं है। इसी आधार पर सरकार के फैसले को चुनौती दी गई।
धारा 122(1)(जी) को लेकर उठे सवाल
राज्य सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(जी) का हवाला देते हुए आशा वर्करों को पंचायत प्रतिनिधि पदों के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि उक्त धारा सरकारी कर्मचारियों पर लागू होती है, जबकि आशा वर्कर मानदेय और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था के तहत कार्य करती हैं। याचिका में कहा गया कि इस आधार पर उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखना उचित नहीं है। मामले में कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को लेकर दोनों पक्षों के तर्क अदालत के समक्ष रखे गए।
कोर्ट की प्रारंभिक टिप्पणी
हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया माना कि आशा वर्कर सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में विस्तृत सुनवाई अगली तारीख पर की जाएगी और संबंधित पक्षों से जवाब प्राप्त होने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश के बाद आशा वर्करों को चुनाव लड़ने को लेकर राहत मिली है।