सुक्खू सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन मामले में दिए जांच के आदेश, पंचायत रिकॉर्ड और दस्तावेज जांच के दायरे में
Himachalnow / शिमला
शिमला जिले की तांगणू-जांगलिख पंचायत में वृद्धावस्था पेंशन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में सरकार ने जांच के निर्देश दिए हैं। पंचायत रिकॉर्ड, पात्रता दस्तावेज और पेंशन स्वीकृति प्रक्रिया की विभागीय स्तर पर समीक्षा की जा रही है।
शिमला
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दिए जांच के निर्देश
शिमला जिले के छौहारा विकास खंड की ग्राम पंचायत तांगणू-जांगलिख में वृद्धावस्था पेंशन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने संबंधित विभागों को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। मामला सामने आने के बाद सरकार की ओर से विभागीय स्तर पर पूरे रिकॉर्ड और दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार पंचायत से जारी परिवार रजिस्टर की नकल, लाभार्थियों की पात्रता और पेंशन स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर भी विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
पंचायत रिकॉर्ड और पात्रता दस्तावेजों की हो रही जांच
विभागीय अधिकारियों की ओर से यह देखा जा रहा है कि पेंशन स्वीकृति के लिए पंचायत से जारी परिवार रजिस्टर की नकल किस आधार पर तैयार की गई थी और लाभार्थियों की पात्रता का सत्यापन नियमानुसार किया गया था या नहीं। तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय से जारी सिफारिशों और संबंधित रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों द्वारा पंचायत स्तर से लेकर विभागीय कार्यालयों तक उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। मामले में संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ भी की जा रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया की तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जिला कल्याण अधिकारी को दिए गए निर्देश
मामला सार्वजनिक होने के बाद निदेशक ई-सोमसा की ओर से जिला कल्याण अधिकारी को निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विभागीय स्तर पर लाभार्थियों के रिकॉर्ड, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता मानकों और स्वीकृति संबंधी दस्तावेजों की विस्तृत जांच जारी है। सरकार की ओर से मामले में सभी प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
नियमों के अनुसार हो सकती है कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यदि जांच के दौरान दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता, गलत जानकारी या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। मामले में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की संभावना को लेकर भी चर्चा है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जिला कल्याण अधिकारी को जांच प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।