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कुटलैहड़ कांग्रेस में कुर्सी संग्राम, जिला अध्यक्ष को ठेंगा दिखाकर ब्लॉक अध्यक्ष ने घोषित किए उम्मीदवार

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल

कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में जिला परिषद चुनावों को लेकर कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेद सामने आए हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष और ब्लॉक स्तर के नेताओं के अलग-अलग रुख के बाद संगठनात्मक स्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ऊना

जिला ऊना के कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस अब विपक्ष से कम और अपने ही नेताओं से ज्यादा लड़ती दिखाई दे रही है। जिला परिषद चुनावों को लेकर कांग्रेस की अंदरूनी जंग अब खुलकर सड़कों पर आ चुकी है। जिस पार्टी में एक नाम तय करने पर ही तलवारें खिंच जाएं, तो वह जनता के मुद्दों पर क्या एकजुटता दिखाएगी, यह सवाल अब आम लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय बन गया है।

बता दें कि कुछ दिन पहले जिला कांग्रेस अध्यक्ष ऊना देशराज गौतम ने जिन प्रत्याशियों के नामों पर खुलकर आपत्ति जताई थी और उन्हें सिरे से खारिज किया था, उन्हीं नामों को अब ब्लॉक अध्यक्ष विवेक मिंका द्वारा विधायक विवेक शर्मा की उपस्थिति में दोबारा घोषित कर दिया गया है। इससे साफ हो गया है कि कांग्रेस में अब जिला अध्यक्ष की बात की कोई अहमियत ही नहीं बची है और हर गुट अपनी-अपनी दुकान चलाने में लगा है।

एक तरफ मंचों पर बड़े-बड़े भाषण दिए जाते हैं कि “पार्टी जिसे टिकट देगी, हम उसके साथ हैं, लेकिन दूसरी तरफ कुर्सी की लड़ाई में कांग्रेसी एक-दूसरे को ही राजनीतिक रूप से खत्म करने पर उतारू होते दिखाई दे रहे हैं। कुटलैहड़ कांग्रेस के हालात ऐसे हो चुके हैं कि कांग्रेस अब जनता के मुद्दों से ज्यादा अपनी अंदरूनी खींचतान और गुटबाज़ी के लिए चर्चा में है।
वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज है कि अगर एक छोटी सी कुर्सी और टिकट के लिए कांग्रेस नेता आपस में ही भिड़ रहे हैं, तो सत्ता मिलने पर जनता के हितों का क्या होगा? कांग्रेस की यह अंदरूनी फूट अब जनता के सामने पूरी तरह नंगी हो चुकी है।

ऐसे में जिला परिषद चुनावों से पहले ही कांग्रेस में मचे इस घमासान ने यह भी साबित कर दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासन नाम की चीज़ लगभग खत्म हो चुकी है। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस हाईकमान इस खुली बगावत पर कोई कार्रवाई करता है या फिर सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा। वहरहाल, कांग्रेस की इस गुटबाजी ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और आम जनता को भी असमंजस में फंसा कर रख दिया है।

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