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हिमाचल में 3,500 करोड़ रुपये की आपदा-रोधी आधारभूत संरचना विकसित होगी, मुख्यमंत्री सुक्खू ने दी जानकारी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और आधारभूत ढांचे को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी अवसंरचना विकसित करने की योजना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यशाला के समापन अवसर पर यह जानकारी देते हुए आपदा प्रबंधन और डेटा आधारित योजना निर्माण पर जोर दिया।

शिमला

आपदा-रोधी आधारभूत संरचना पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) में आयोजित ‘Towards Resilience Infrastructure Planning in Himalaya’ विषयक उच्च स्तरीय कार्यशाला के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत संरचना विकसित करेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश भौगोलिक रूप से संवेदनशील पर्वतीय राज्य है, जहां भारी वर्षा, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक घटनाओं का प्रभाव लगातार देखा जाता है। ऐसे में सड़क, पुल, भवन, जलापूर्ति, विद्युत और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

2023 की आपदा से मिले अनुभवों को योजना में किया गया शामिल

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 75,000 पर्यटक प्रभावित हुए थे। सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा अन्य विभागों के समन्वित प्रयासों से सभी पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया और आवश्यक सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया। उन्होंने बताया कि चंद्रताल झील क्षेत्र में फंसे करीब 300 पर्यटकों को भी सुरक्षित निकालने के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अनुभव भविष्य की आपदा प्रबंधन रणनीति और आधारभूत संरचना की योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रिपोर्ट और एसआईएयू पोर्टल का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘Towards Resilient Himachal Pradesh: Lessons and Recommendations from 2023 and 2025 Hydro Meteorological Disaster’ शीर्षक रिपोर्ट का विमोचन किया। इस रिपोर्ट में हाल के वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं के अनुभव, तकनीकी विश्लेषण और भविष्य के लिए सुझाए गए उपाय शामिल हैं। इसके साथ ही हिमाचल सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (SIAU Portal) का भी शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पोर्टल विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव का आकलन करने तथा डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता करेगा।

विशेषज्ञों ने दी आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की सलाह

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने कहा कि पश्चिमी हिमालय जलवायु परिवर्तन और भू-वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि भविष्य में संभावित जोखिमों को कम करने के लिए आधुनिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, संवेदनशील हिमनदीय झीलों की नियमित निगरानी, पर्वतीय क्षेत्रों के अनुरूप इंजीनियरिंग मानकों का पालन, वैज्ञानिक आधार पर निर्माण कार्य तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार दीर्घकालिक योजना और विभागों के बीच समन्वित कार्यप्रणाली राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत बनाने में सहायक होगी।