Loading...

मेला राम शर्मा बोले— ओबीसी समाज राजनीतिक षड्यंत्र के बहकावे में न आए

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 59 Mins Ago • 1 Min Read

हरिपुरधार में आयोजित हाटी समिति की बैठक में मेला राम शर्मा ने ओबीसी समाज से तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने और राजनीतिक बहकावे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने ट्रांसगिरी क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने को संवैधानिक अधिकार बताते हुए ओबीसी और एसटी से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर अपने विचार रखे। बैठक के दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार से संबंधित व्यवस्थाओं पर विचार करने का भी आग्रह किया।

हरिपुरधार

ट्रांसगिरी क्षेत्र में हाटी समिति के संस्थापक सदस्य मेला राम शर्मा ने ओबीसी समाज से राजनीतिक षड्यंत्र के बहकावे में नहीं आने और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की अपील की है। वह शुक्रवार को माता भंगायणी मंदिर, हरिपुरधार में आयोजित हाटी समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे।मेला राम शर्मा ने कहा कि ट्रांसगिरी क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा मिलना यहां के लोगों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग में 22 जातियां शामिल हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग की आबादी अपेक्षाकृत कम है। उनके अनुसार, ओबीसी वर्ग की पात्रता क्रीमी लेयर एवं अन्य प्रावधानों के अधीन होती है, जबकि अनुसूचित जनजाति का दर्जा संवैधानिक रूप से स्थायी प्रकृति का है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग ओबीसी समाज को 27 प्रतिशत आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका दावा था कि ट्रांसगिरी क्षेत्र के युवाओं को ओबीसी व्यवस्था का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं ने आरक्षण का लाभ लेकर विभिन्न उच्च सेवाओं में स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने क्रीमी लेयर और भूमि सीमा से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई परिवार इन शर्तों के कारण ओबीसी लाभ से वंचित हो जाते हैं।

मेला राम शर्मा ने कहा कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी और आरक्षण के अनुपात को लेकर भी गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि यदि संभव हो तो किन्नौर की तर्ज पर ओबीसी वर्ग के पात्र लोगों को अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ ओबीसी वर्ग के लाभ देने की व्यवस्था पर भी विचार किया जाए।उन्होंने ओबीसी समाज से किसी भी राजनीतिक बहकावे में न आने तथा अपने और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विवेकपूर्ण निर्णय लेने का आह्वान किया।