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बीबीएमबी से 4,200 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के प्रयास तेज, मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से मांगा सहयोग

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 50 Mins Ago • 1 Min Read

किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर प्रदेश के हितों के अनुरूप निर्णय के बाद अब हिमाचल सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से लंबित वित्तीय अधिकारों और बकाया राशि की वसूली के प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस संबंध में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से दूरभाष पर बातचीत कर हिमाचल प्रदेश के वैधानिक अधिकारों के संरक्षण और बकाया राशि की वसूली के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

शिमला

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को बताया कि किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना पर हिमाचल प्रदेश तभी आगे बढ़ेगा, जब हरियाणा सरकार बीबीएमबी से संबंधित अपने हिस्से के बकाया भुगतान पर स्पष्ट सहमति देगी और इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में शपथ-पत्र दाखिल करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकारों की अनदेखी कर नई परियोजनाओं में सहयोग की अपेक्षा उचित नहीं है। मुख्यमंत्री के आग्रह पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आश्वासन दिया कि वह इस विषय पर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 15 वर्ष पहले सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी की परियोजनाओं और उनसे मिलने वाले लाभों में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार दिया था। इसके बावजूद प्रदेश को पिछले एक दशक से अधिक समय से अपने हिस्से की 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़े वित्तीय लाभ प्राप्त नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अब बीबीएमबी से अपने हिस्से के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठा रही है।

किशाऊ परियोजना को बताया प्रदेश के हित में फैसला

मुख्यमंत्री ने कहा कि 422 मेगावाट की किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना के संबंध में वर्ष 2023 में पुराने समझौते को स्वीकार नहीं किया गया था, क्योंकि उसके तहत हिमाचल प्रदेश को बिजली उत्पादन लागत का बड़ा हिस्सा वहन करना पड़ता। उन्होंने कहा कि सरकार के रुख के बाद अब प्रदेश को इस परियोजना में कोई पूंजी निवेश किए बिना प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, जिसे उन्होंने हिमाचल के अधिकारों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

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