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हिमाचल में खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े, आटा, तेल, दूध और घी की कीमतों में आया बदलाव

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 24 May 2026 • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन महीनों के दौरान रोजमर्रा में उपयोग होने वाली कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खाद्य तेल, आटा, चावल, मसाले, दूध, घी और बेकरी उत्पादों के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर प्रभाव देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार परिवहन लागत और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर के कारण खुदरा बाजार में कीमतों में लगातार बदलाव दर्ज किए जा रहे हैं।

शिमला

फरवरी से मई के बीच बढ़ी खाद्य वस्तुओं की कीमतें

हिमाचल प्रदेश में फरवरी 2026 से मई 2026 के बीच खाद्य वस्तुओं की खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय अंतर दर्ज किया गया है। बाजार में सरसों तेल की कीमत 175 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 190 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, यानी इसमें 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसी प्रकार रिफाइंड तेल फरवरी में 165 रुपये प्रति लीटर था, जो अब बढ़कर 170 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चावल की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। फरवरी में 65 से 70 रुपये प्रति किलो बिकने वाला चावल अब 70 से 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

आटा और मसालों के दामों में भी आया बदलाव

रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले आटे की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। फरवरी महीने में जो आटा 35 से 38 रुपये प्रति किलो उपलब्ध था, वह अब 38 से 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इसके अलावा मसालों की कीमतों में भी पिछले तीन महीनों में तेजी दर्ज की गई है। गरम मसाला फरवरी में 105 से 110 रुपये प्रति 100 ग्राम था, जो अब 110 से 115 रुपये प्रति 100 ग्राम तक पहुंच गया है। देगी मिर्च की कीमतों में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फरवरी में इसकी कीमत 100 से 105 रुपये प्रति 100 ग्राम थी, जो अब बढ़कर 120 से 125 रुपये प्रति 100 ग्राम तक पहुंच गई है।

खाद्य तेल कंपनियों पर पैकिंग वजन घटाने के आरोप

बाजार में उपभोक्ताओं के बीच यह चर्चा भी रही कि कुछ खाद्य तेल कंपनियों ने एक लीटर के पैकेट का वास्तविक वजन कम कर दिया है। जानकारी के अनुसार कई ब्रांड्स में एक लीटर पैक के नाम पर 700 से 750 ग्राम तक उत्पाद उपलब्ध करवाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी के साथ पैकिंग मात्रा में कमी का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ रहा है।

डेयरी और बेकरी उत्पाद भी हुए महंगे

पिछले तीन महीनों के दौरान डेयरी और बेकरी उत्पादों की कीमतों में भी बदलाव देखा गया है। हिम घी की कीमत फरवरी में लगभग 660 रुपये प्रति किलो थी, जो मई तक बढ़कर 725 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। यानी घी के दाम में करीब 65 रुपये प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है। वेरका दूध के दाम भी 66 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 68 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। इसके अलावा ब्राउन ब्रेड का रेट 55 रुपये से बढ़कर 60 रुपये तक पहुंच गया है।

परिवहन लागत और आपूर्ति श्रृंखला का असर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन लागत पर पड़ा है। मालभाड़ा बढ़ने के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति लागत में भी वृद्धि हुई है, जिसका सीधा प्रभाव खुदरा बाजार पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी परिस्थितियों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कई खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है।

प्रशासनिक निगरानी पर भी दिया जा रहा ध्यान

प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और बाजार निगरानी पर ध्यान देने की बात कही जा रही है। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय स्तर पर जमाखोरी और अनावश्यक मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए निगरानी की जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को निर्धारित दरों पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो सके।

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