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हिमाचल में 2183 सड़कों के लिए वन भूमि हस्तांतरण योजना, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 20 Jun 2026 • 1 Min Read

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वन विभाग को राज्य में वन संरक्षण अधिनियम की स्वीकृति के बिना निर्मित 2183 सड़कों के लिए वन भूमि हस्तांतरण की व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह प्रक्रिया वन अधिकार अधिनियम, 2006 और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पूरी की जाएगी।

शिमला

वन विभाग की बैठक में दिए निर्देश

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में आयोजित वन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को राज्य में वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए), 1980 की पूर्व स्वीकृति के बिना निर्मित 2183 सड़कों से संबंधित मामलों के लिए वन भूमि हस्तांतरण (भू-डायवर्जन) की व्यापक और चरणबद्ध योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन मामलों को वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के प्रावधानों तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। बैठक में विभिन्न जिलों में लंबित मामलों की स्थिति, आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता तथा स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण संपर्क अवसंरचना को मजबूत करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि जिन 2183 सड़कों के मामलों पर विचार किया जा रहा है, उनमें से बड़ी संख्या ऐसी सड़कों की है जो वर्षों से ग्रामीण आबादी को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि विपणन और अन्य आवश्यक सेवाओं से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय और आपदा संभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विशेष महत्व है, क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य आपात स्थितियों तथा राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान इन मार्गों का उपयोग किया जाता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क संपर्क से जुड़े मामलों में स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जाए।

2006 से पहले निर्मित हैं सड़कें

बैठक में बताया गया कि संबंधित सड़कें वर्ष 2006 में वन अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले विभिन्न ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में निर्मित की गई थीं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से 2026 के बीच ऐसे मामलों में केवल 150 सड़कों को आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हो सकी हैं, जबकि बड़ी संख्या में मामले अभी भी प्रक्रियाधीन हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन सड़कों से हजारों ग्रामीण परिवारों को आवागमन की सुविधा मिल रही है और कई क्षेत्रों में ये सड़कें स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा कृषि गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बैठक में लंबित मामलों की श्रेणीवार समीक्षा की गई तथा आवश्यक औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया गया।

उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होगी कार्रवाई

इस विषय से संबंधित एक जनहित याचिका हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर की गई थी, जिसके बाद न्यायालय ने विभाग को वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामलों की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में अधिकारियों ने न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की वर्तमान स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाएगा तथा आवश्यक अनुमतियों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि संबंधित अभिलेखों और तकनीकी रिपोर्टों को समय पर तैयार कर प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य सचिव के.के. पंत, महाधिवक्ता अनूप रतन, विशेष सचिव (वन) विजय कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों की प्रगति, लंबित प्रस्तावों की स्थिति, विभागीय समन्वय तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न जिलों से प्राप्त प्रस्तावों और उनके निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी भी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी मामलों की नियमित समीक्षा की जाए ताकि आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जा सके।