धर्मशाला में आयोजित एक कार्यशाला में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जिला और उपमंडल स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य पात्र लोगों को उनकी जीवन निर्वाह भूमि पर मालिकाना हक दिलाना है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी पंचायतों में वन अधिकार समितियों का गठन अनिवार्य होगा और इन समितियों को अधिनियम की जानकारी देने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कार्यशाला में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
वन अधिकार प्राप्त करने की प्रक्रिया
मंत्री ने बताया कि पात्र लोगों को निर्धारित फार्म पर आवेदन करना होगा, जिसे ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। आवेदन के लिए आवश्यक शर्तें इस प्रकार हैं:
- आवेदक को यह प्रमाणित करना होगा कि वह 13 दिसंबर 2005 से पहले तीन पीढ़ियों से इस भूमि पर निवास कर रहा है।
- आवेदन पत्र में पति और पत्नी दोनों के नाम अनिवार्य रूप से दर्ज होने चाहिए।
- अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जबकि सामान्य वर्ग के लोगों को वोटर आईडी या आधार कार्ड के जरिए अपनी पहचान साबित करनी होगी।
- भूमि के स्वामित्व का दावा करने के लिए दो बुजुर्गों की गवाही आवश्यक होगी।
- यदि भूमि का राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो नक्शा नजरी बनाकर प्रस्तुत करना होगा।
ग्राम सभा और वन अधिकार समिति की भूमिका
आवेदन पत्र पंचायत की ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और वन अधिकार समिति (एफआरटी) के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। इस समिति में अधिकतम 15 सदस्य होंगे, जिनमें एक तिहाई महिलाएं होंगी। समिति के अध्यक्ष और सचिव का चयन किया जाएगा, और यह समिति मौके पर जाकर दावे की सत्यता की रिपोर्ट तैयार करेगी।
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- सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पटवारी और वन रक्षक की उपस्थिति अनिवार्य होगी। अनुपस्थित रहने पर ₹1000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- समिति दावे की जांच के बाद इसे पंचायत सचिव के माध्यम से विशेष ग्राम सभा को भेजेगी।
- विशेष ग्राम सभा में परिवार के सभी व्यस्क सदस्य मतदान कर सकेंगे। यदि 50% से अधिक सदस्य दावे को मंजूरी देते हैं, तो मालिकाना हक मिलना तय हो जाएगा।
- सभी अनुमोदित मामले उपमंडल स्तरीय समिति को भेजे जाएंगे, जो सत्यापन के बाद जिला स्तरीय समिति को प्रेषित करेगी।
- जिला स्तरीय समिति, जो उपायुक्त की अध्यक्षता में कार्य करेगी, अंतिम स्वीकृति प्रदान करेगी और पात्र दावेदारों को भूमि का पट्टा सौंपा जाएगा।
वन अधिकार अधिनियम सरकार की ऐतिहासिक पहल: पठानिया
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने वन अधिकार अधिनियम को एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इससे पात्र लोगों को उनका मालिकाना हक मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जागरूकता कार्यशालाओं के आयोजन से न केवल अधिकारियों, बल्कि आम जनता को भी इस अधिनियम की विस्तृत जानकारी मिलेगी।
इस अवसर पर पर्यटन निगम के अध्यक्ष आर.एस. बाली, योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी पठानिया, उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक किशोरी लाल, विधायक आशीष बुटेल, विधायक मलेंद्र राजन और विधायक विवेक शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
कार्यशाला में जनजातीय विकास विभाग के संयुक्त निदेशक कैलाश चौहान ने अधिनियम से संबंधित एक प्रेजेंटेशन दी। इस अवसर पर उपायुक्त हेमराज बैरवा ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और डीसी चंबा, उना, चंबा व कांगड़ा के उपमंडलाधिकारी एवं डीएफओ भी उपस्थित रहे।
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