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Himachal Government: ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ और ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ 2 अक्तूबर से होगी शुरू

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 49 Mins Ago • 1 Min Read

Himachal Government: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ और ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ 2 अक्तूबर से शुरू की जाएंगी। पहली योजना के तहत प्रदेश के चिह्नित 1.80 लाख आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की जरूरतों का आकलन कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। दूसरी योजना का पायलट चरण 21 आईसीडीएस ब्लॉकों में शुरू होगा, जिसके माध्यम से महिलाओं, माताओं और बच्चों को दिए जा रहे पोषण सहयोग को मजबूत किया जाएगा।

बड़सर

मुख्यमंत्री ने हमीरपुर जिले के बड़सर में आयोजित राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया, परेड का निरीक्षण किया और मार्च पास्ट की सलामी ली। परेड का नेतृत्व पुलिस उप-अधीक्षक प्रणव चौहान ने किया। इसमें राज्य पुलिस, आईआरबी धौलाकुआं, आईआरबी पंडोह, जिला पुलिस हमीरपुर, हरियाणा पुलिस, महिला पुलिस, होमगार्ड और यातायात पुलिस की टुकड़ियों ने भाग लिया। क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों और राजकीय डिग्री कॉलेज बड़सर के विद्यार्थियों ने भी मार्च पास्ट में हिस्सा लिया।

1.80 लाख परिवारों पर केंद्रित होगी योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की पहचान के लिए पिछले एक वर्ष में आठ चरणों में सर्वेक्षण करवाया। प्रदेश के लगभग 19 लाख परिवारों में से 1.80 लाख परिवार ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें अधिक सहायता और ध्यान देने की आवश्यकता है। उपायुक्तों के माध्यम से इन परिवारों का चयन किया गया है और अंतिम सूचियां अधिसूचित कर दी गई हैं। ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना के तहत अगले दो वर्षों में इन परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाएगा।

सभी उपायुक्तों को योजना में शामिल प्रत्येक परिवार की जरूरतों का अगले दो महीने में आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके आधार पर परिवारों के लिए आवश्यक विशेष सहायता की पहचान की जाएगी और केंद्र तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को उन पर केंद्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चिह्नित परिवारों में आधे से अधिक पहले से बीपीएल सूची में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बीपीएल सूची में कोई कटौती नहीं की जाएगी और संबंधित परिवारों को मिल रहे मौजूदा लाभ जारी रहेंगे।

21 आईसीडीएस ब्लॉकों में चलेगा पोषण योजना का पायलट

‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ का पायलट चरण प्रदेश के विभिन्न जिलों के 21 आईसीडीएस ब्लॉकों में शुरू किया जाएगा। छह महीने बाद इसकी समीक्षा होगी और परिणामों के आधार पर इसे पूरे हिमाचल प्रदेश में लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा। योजना में महिलाओं, माताओं और छह महीने से तीन वर्ष तक के बच्चों को मिल रहे पोषण सहयोग को मजबूत किया जाएगा। चावल, दाल, तेल, बिस्किट, पंजीरी और मिल्क पाउडर की जगह अधिक पौष्टिक तथा स्वच्छ तरीके से पैक किए गए प्रीमिक्स खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाए जाएंगे।

लाभार्थियों की पसंद के अनुसार सप्ताह में तीन बार दूध या अंडे भी दिए जाएंगे। तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को मिलने वाले गर्म पके भोजन की पोषण गुणवत्ता बेहतर की जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार योजना में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खरीद प्रक्रिया की जिम्मेदारी जिला और आईसीडीएस ब्लॉक स्तर को सौंपी जाएगी। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पारदर्शी खरीद के साथ महिलाओं और बच्चों के लिए स्वच्छ, ताजा तथा गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाना है।

कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए भुगतान की घोषणा

मुख्यमंत्री ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इसी माह वेतन बकाया के रूप में अतिरिक्त 20,000 रुपये देने की घोषणा की। वर्ष 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त तृतीय श्रेणी पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को पेंशन बकाया का अतिरिक्त 35 प्रतिशत मिलेगा। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के पेंशनरों तथा पारिवारिक पेंशनरों को बकाया का 15 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। सरकार इन भुगतानों पर 281 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस माह से 31 मार्च, 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले चिकित्सकों की सेवाएं भी उस तारीख तक जारी रखने की घोषणा की गई।

एनएचएम हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत कार्यरत लगभग 9,000 आशा कार्यकर्ताओं का मासिक प्रोत्साहन 5,800 रुपये से बढ़ाकर 6,800 रुपये किया जाएगा। वे एनएचएम कर्मचारी, जिन्होंने वेतन युक्तिकरण के बाद सात वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें 1 अप्रैल, 2026 से संशोधित वेतन मिलेगा। आउटसोर्स स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्टों, ऑपरेशन थिएटर सहायकों और प्रयोगशाला तकनीशियनों के लिए 25,000 रुपये प्रतिमाह तथा डेटा एंट्री ऑपरेटरों के लिए 18,000 रुपये प्रतिमाह पारिश्रमिक घोषित किया गया। यह संशोधित पारिश्रमिक 1 सितंबर, 2026 से प्रभावी होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मल्टी-टास्क वर्कर्स और आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और उन्हें उचित लाभ देने के लिए नीति लाने पर भी विचार हो रहा है। उन्होंने जल शक्ति विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 4,000 पद भरने और अगले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश में 100 नए सीबीएसई स्कूल खोलने की घोषणा भी की।

दुग्ध प्रसंस्करण ढांचे पर खर्च होंगे 150 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री ने बताया कि कांगड़ा जिले के ढगवार में लगभग 250 करोड़ रुपये से प्रतिदिन 1.5 लाख लीटर क्षमता वाला दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है और इसका कार्य इसी वर्ष पूरा होगा। इससे कांगड़ा, ऊना, चंबा और हमीरपुर जिलों के किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई। उन्होंने अगले दो वर्षों में सोलन, ऊना, सिरमौर, शिमला, मंडी, कुल्लू और हमीरपुर जिलों के दुग्ध प्रसंस्करण ढांचे पर 150 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की। समर्पित बागवानी नीति से करीब 82,200 रोजगार अवसर बनने की उम्मीद भी जताई गई।

पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये की योजना लागू की जा रही है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंडी जिले में माता बगलामुखी रोपवे जनता को समर्पित किया गया है, जबकि चिंतपूर्णी और बाबा बालक नाथ मंदिर में भी रोपवे बनाए जाएंगे। उन्होंने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों और 200 शिक्षकों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए विदेश भेजने तथा आगामी वर्षों में मेधावी विद्यार्थियों और डॉक्टरों को भी ऐसी सुविधा उपलब्ध करवाने की बात कही।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेजों और चमियाणा अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। उनके अनुसार निजी अस्पतालों में इस सर्जरी की लागत आमतौर पर पांच लाख रुपये से अधिक होती है, जबकि सरकारी संस्थानों में इसे 30,000 से 80,000 रुपये में उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने आईजीएमसी शिमला को मजबूत करने और मरीज केंद्रित सुविधाओं का विस्तार करने की जानकारी भी दी।

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