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नगरोटा बगवां में पहली बार तैयार हुआ ड्रैगन फ्रूट जैम, उच्च मूल्य फसलों पर 50 फीसदी उपदान

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 46 Mins Ago • 1 Min Read

कांगड़ा की फल डिब्बाबंदी इकाई नगरोटा बगवां में पहली बार प्राकृतिक खेती से उत्पादित ड्रैगन फ्रूट का जैम तैयार किया गया है। किसान जीवन सिंह राणा ने छोटे आकार और बिना बिके फलों के उपयोग से लगभग 23 किलोग्राम जैम बनवाया। उद्यान विभाग किसानों को फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान कम करने के लिए प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

धर्मशाला

उद्यान विभाग के अनुसार कांगड़ा और ऊना जिलों में किसान पारंपरिक खेती के साथ उच्च मूल्य वाली फल फसलों को अपना रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट की अच्छी गुणवत्ता वाली उपज बाजार में बिक जाती है, लेकिन छोटे आकार, अतिरिक्त और बिना बिके फलों के विपणन में परेशानी आती है। इसी समस्या के समाधान के लिए विभाग ने नगरोटा बगवां स्थित फल डिब्बाबंदी इकाई में उपलब्ध प्रसंस्करण सुविधा का उपयोग करने की सलाह दी, जिसके बाद पहली बार वहां ड्रैगन फ्रूट जैम तैयार किया गया।

प्रसंस्करण के लिए 50 से 65 रुपये प्रति किलो शुल्क

फल डिब्बाबंदी इकाई नगरोटा बगवां के विषय विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार नेगी ने जैम तैयार करने में तकनीकी सहायता दी। सामुदायिक डिब्बाबंदी सेवाओं के तहत उद्यान विभाग उत्पाद और प्रसंस्करण की आवश्यकता के आधार पर लगभग 50 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम सेवा शुल्क लेता है। जीवन सिंह राणा ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित ड्रैगन फ्रूट से करीब 23 किलोग्राम जैम तैयार कराया और इसकी गुणवत्ता तथा स्वाद पर संतोष व्यक्त किया। विभाग का कहना है कि इससे किसानों को अनुपयोगी उपज के बेहतर इस्तेमाल का विकल्प मिल सकता है।

500 पौधों से शुरू कर 5000 तक पहुंचाई खेती

सेवानिवृत्त व्याख्याता जीवन सिंह राणा और उनके पुत्र आशीष सिंह राणा ने प्राकृतिक खेती पद्धति से शुरुआत में करीब 500 ड्रैगन फ्रूट पौधों का प्रवर्धन किया था। अब उन्होंने 35 कनाल क्षेत्र में लगभग 5000 पौधों तक खेती का विस्तार कर लिया है। उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 में उन्होंने पंजीकृत ड्रैगन फ्रूट नर्सरी भी स्थापित की। आशीष सिंह राणा को डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के 41वें स्थापना दिवस पर प्राकृतिक खेती में सफलता के लिए उत्कृष्ट किसान सम्मान दिया गया था।

पांच उच्च मूल्य वाली फल फसलों पर 50 फीसदी उपदान

मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत किसान ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो, ब्लूबेरी, कीवी और स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए 50 फीसदी उपदान का लाभ ले सकते हैं। हिमाचल प्रदेश फल नर्सरी पंजीकरण और विनियमन अधिनियम, 2015 के तहत कई किसानों ने ड्रैगन फ्रूट नर्सरियां स्थापित की हैं। कांगड़ा के फतेहपुर, नूरपुर, देहरा, इंदौरा और सुलह विकास खंडों के साथ ऊना जिले में भी किसान ड्रैगन फ्रूट के बगीचे लगा रहे हैं।

संयुक्त निदेशक उद्यान कांगड़ा डॉ. कमल शील नेगी ने खेती के विस्तार और नर्सरी प्रबंधन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दिया। योजनाओं, उपदान और तकनीकी सहायता की जानकारी के लिए किसान संबंधित विषय विशेषज्ञ उद्यान, उद्यान विकास अधिकारी या उद्यान प्रसार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। उद्यान विभाग ने किसानों से छोटे आकार, अतिरिक्त और बाजार में नहीं बिकने वाले फलों को बर्बाद होने से बचाने के लिए उपलब्ध प्रसंस्करण सुविधाओं का उपयोग करने का आग्रह किया है।