हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं से पानी का बिल वसूलने का फैसला वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने महाकुंभ से लौटकर अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह निर्देश जारी किए। हालांकि, होम स्टे, होटल, अस्पताल और धर्मशालाओं जैसे व्यावसायिक उपभोक्ताओं से पानी के बिल की वसूली जारी रहेगी।
फैसले में बदलाव की वजह
सितंबर 2023 में सरकार ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं से 100 रुपये मासिक जल शुल्क वसूलने का निर्णय लिया था। 1 अक्टूबर से जल शक्ति विभाग ने कई इलाकों में यह बिल वसूलना भी शुरू कर दिया था। हालांकि, जनता के विरोध और फीडबैक को ध्यान में रखते हुए अब सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया है।
सरकार का नया आदेश
- घरेलू उपभोक्ताओं से पानी का बिल नहीं लिया जाएगा।
- व्यावसायिक उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं मिलेगी।
- जल शक्ति विभाग को नए निर्देश लागू करने के आदेश दिए गए हैं।
जिन्होंने बिल जमा कर दिया, उनका क्या होगा?
कई लोगों ने जल शक्ति विभाग को पानी के बिल का भुगतान कर दिया है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस राशि को वापस किया जाएगा या नहीं।
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पिछली सरकार का फैसला और सियासी हलचल
पूर्व भाजपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति मुफ्त कर दी थी, लेकिन सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही इसे बदल दिया और शुल्क वसूलने का आदेश जारी किया। भाजपा ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया था। अब सरकार ने खुद ही अपना फैसला पलट दिया है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
हिमाचल में ग्रामीण जल उपभोक्ताओं की स्थिति
- राज्य में 17 लाख ग्रामीण पेयजल उपभोक्ता हैं।
- 2019 में जल जीवन मिशन के तहत 9.50 लाख नए कनेक्शन जोड़े गए।
- पहले से 7.63 लाख जल कनेक्शन मौजूद थे।
सरकार का यह कदम ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए राहतभरा है, लेकिन जो लोग पहले ही बिल भर चुके हैं, उनके लिए अब तक कोई स्पष्टता नहीं है। इस फैसले के पीछे की असली वजह भले ही न बताई गई हो, लेकिन राजनीतिक दबाव और जनता की नाराजगी की भूमिका इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
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