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प्रदेश के बैंकों में पड़े सरकारी पैसे की जांच करवाएगी सुक्खू सरकार

हिमाचलनाउ डेस्क • 9 Feb 2025 • 1 Min Read

शिमला | हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के बैंकों में पड़ी अनयूटिलाइज्ड सरकारी धनराशि की जांच शुरू कर दी है। विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा ट्रेजरी से निकाली गई लेकिन खर्च न हो सकी रकम की समीक्षा की जा रही है।

बैंकों में पड़ा है करोड़ों का अनउपयोगित धन

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को जानकारी मिली कि प्रदेश के कई विभागों के पास करोड़ों रुपये बैंकों में पड़े हैं, जिन्हें किसी योजना में खर्च नहीं किया गया। वित्त एवं योजना विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभागों से इस धनराशि का पूरा ब्यौरा लिया जाए।

अब तक हुई जांच में सामने आए आंकड़े:

  • उच्च शिक्षा निदेशालय – ₹1000 करोड़
  • प्रारंभिक शिक्षा विभाग – ₹100 करोड़

इसके अलावा अन्य विभागों के पास भी बड़ी रकम पड़ी हो सकती है, जिसकी जांच जारी है।

सरकार करेगी नए सिरे से धनराशि का उपयोग

वित्त विभाग सभी विभागों से इस धनराशि का ब्यौरा इकट्ठा कर रहा है। सरकार इसे पुनः योजनाओं में लगाने पर विचार कर रही है, जिससे विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।

  • कई योजनाओं के लिए निकाला गया पैसा खर्च नहीं हुआ और उसे बैंक में एफडी या अन्य खातों में रखा गया।
  • सरकार इस पैसे का नए सिरे से उपयोग करने की योजना बना रही है।

सवाल उठे – जब जरूरत नहीं थी तो ट्रेजरी से पैसा निकाला क्यों?

यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जब विभागों को तत्काल आवश्यकता नहीं थी, तो उन्होंने यह धनराशि ट्रेजरी से निकाली ही क्यों?

वित्त विभाग के अनुसार, फाइनेंशियल रूल्स के तहत बिना जरूरत के ट्रेजरी से पैसा निकालना अनुचित है। ऐसे में उन अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है, जिन्होंने बिना किसी ठोस योजना के धन निकासी की।

बजट से पहले रिपोर्ट सौंपेगी सरकार

सरकार बजट से पहले इस पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर रही है। वित्त एवं योजना विभाग मुख्यमंत्री को यह जानकारी देगा कि:

  1. कौन-कौन से विभागों ने ट्रेजरी से पैसा निकाला?
  2. किस योजना के लिए यह पैसा निकाला गया?
  3. यह धन अब तक खर्च क्यों नहीं किया गया?

सरकार के इस कदम से क्या होगा फायदा?

  • राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और योजनाओं को नए सिरे से लागू किया जा सकेगा।
  • विकास कार्यों में तेजी आएगी, क्योंकि पहले से निकाले गए धन का सही उपयोग होगा।
  • भविष्य में वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सकेगा, जिससे सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।