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हिमाचल हाईकोर्ट ने डीपीई नियुक्तियों से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर भर्ती नियमों पर दिया फैसला

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं की नियुक्ति और वरिष्ठता से जुड़ी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के बाहर जाकर किसी भी नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता और मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

शिमला

डीपीई नियुक्ति और वरिष्ठता विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं (डीपीई) की नियुक्ति और वरिष्ठता से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए उन्हें खारिज कर दिया है। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और भर्ती प्रक्रिया का अवलोकन करने के बाद कहा कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के बाहर जाकर किसी भी प्रकार की नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान आरएंडपी नियमों में डीपीई पदों के लिए बैचवाइज भर्ती का कोई प्रावधान उपलब्ध नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति और परिणामी लाभ की उठाई मांग

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में मांग रखी गई थी कि उन्हें रोजगार कार्यालयों के माध्यम से सीधी भर्ती के आधार पर उचित तिथि से नियुक्ति दी जाए और अन्य नियुक्त उम्मीदवारों की तरह सभी परिणामी लाभ भी प्रदान किए जाएं। याचिका में कहा गया कि वे निर्धारित योग्यता और वरिष्ठता रखने के बावजूद नियुक्तियों से वंचित रह गए, जबकि उनसे कनिष्ठ उम्मीदवारों को डीपीई पदों पर नियुक्त कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग ने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना पदों को भरा।

राज्य सरकार ने भर्ती कोटे और पूर्व नियुक्तियों का दिया विवरण

मामले में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्तमान में शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं के कुल 1527 पद स्वीकृत हैं। भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार इनमें से 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 75 प्रतिशत पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने निर्धारित हैं। सरकार ने यह भी बताया कि सीधी भर्ती के लिए निर्धारित 382 पदों के मुकाबले पहले ही 645 डीपीई नियुक्त किए जा चुके हैं, जो निर्धारित कोटे से अधिक हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2003 में पैरा-शिक्षक नीति के तहत नियुक्त किए गए 89 डीपीई कर्मचारियों की सेवाओं को बाद में नियमित किया गया था।

देरी और आवश्यक पक्षकार शामिल न होने पर याचिकाएं खारिज

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2005 से 2011 के बीच हुई नियुक्तियों को वर्ष 2014 में चुनौती दी, जिसे देरी माना गया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों की नियुक्तियों को अवैध बताया गया, उन्हें मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया। अदालत के अनुसार किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध उसकी अनुपस्थिति में आदेश पारित नहीं किया जा सकता। इन सभी तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अदालत ने याचिकाओं को खारिज कर दिया।