मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व ड्रग्स विभाग अधिकारी निशांत सरीन को हिमाचल हाईकोर्ट से नियमित जमानत
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व ड्रग्स विभाग अधिकारी निशांत सरीन की नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की है। अदालत ने न्यायिक हिरासत की अवधि और लंबित मामलों की कानूनी प्रक्रिया को आदेश का आधार माना।
शिमला
हाईकोर्ट ने नियमित जमानत मंजूर की
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की एकल पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व ड्रग्स विभाग अधिकारी निशांत सरीन की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली। अदालत ने लगभग 10 माह की न्यायिक हिरासत और मुख्य मामलों में चल रही कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए सशर्त रिहाई के आदेश दिए।
भ्रष्टाचार मामले के आधार पर दर्ज हुआ था ईडी का केस
मामला उस अवधि से संबंधित है जब निशांत सरीन ड्रग्स इंस्पेक्टर और सहायक ड्रग्स कंट्रोलर के पद पर कार्यरत थे। विजिलेंस विभाग ने वर्ष 2019 में उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर फार्मा कंपनियों से होटल बुकिंग, हवाई टिकट और नकद के रूप में लगभग 43 लाख रुपये का अवैध लाभ प्राप्त किया गया। इसी मामले के आधार पर ईडी ने 31 मार्च 2023 को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।
ईडी ने जांच के दौरान की थी कार्रवाई
जांच के दौरान ईडी ने निशांत सरीन और उनके सहयोगियों से जुड़े बैंक खाते, वाहन तथा सोने की संपत्ति को फ्रीज और जब्त किया। इसके बाद 9 अक्तूबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार किया गया। ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि आरोपी प्रभावशाली हैं और रिहाई की स्थिति में गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं।
दो लाख रुपये के मुचलके पर मिली रिहाई
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विजिलेंस के एक मामले की जांच अभी जारी है तथा दूसरे मामले में आरोप तय नहीं हुए हैं। इसे देखते हुए निकट भविष्य में मुकदमे के शीघ्र निष्पादन की संभावना सीमित है। हाईकोर्ट ने निशांत सरीन को दो लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया है।
