हिमाचल में 9 और 10 अप्रैल को होगी 441 शराब ठेकों की नीलामी, बड़ी यूनिट की जगह अब एक-एक ठेके की लगेगी बोली
शिमला, 8 अप्रैल 2025।
हिमाचल प्रदेश में शराब ठेकों की नीलामी प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। बीते दो हफ्तों से जारी इस प्रक्रिया के तहत कई जिलों में बड़ी यूनिट्स बिक नहीं पाईं, जिसके चलते अब सरकार ने रणनीति में बदलाव करते हुए 9 और 10 अप्रैल को एक-एक ठेके की नीलामी करने का निर्णय लिया है। अगर इस बार भी ये ठेके नहीं बिके, तो राज्य सरकार अपने निगम और बोर्डों के माध्यम से शराब बिक्री का जिम्मा उठाएगी।
शराब ठेकों की यह नीलामी सुबह 9 बजे से शुरू होगी। इससे पहले, 7 और 8 अप्रैल को नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आवश्यक फार्म वितरित किए गए हैं। सरकार ने इस बार उम्मीद जताई है कि ठेकेदार छोटे यूनिट्स के प्रति ज्यादा रुचि दिखाएंगे, क्योंकि पिछली नीलामी में बड़ी यूनिट्स की ऊंची बेस प्राइस के कारण पर्याप्त बोलियां नहीं आई थीं।
शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और बिलासपुर जैसे प्रमुख जिलों में अब भी सैकड़ों यूनिट्स बिकने को बाकी हैं। इनमें शिमला जिले के 113, मंडी के 134, कुल्लू के 76, कांगड़ा के 102 और बिलासपुर के 16 ठेके शामिल हैं। विभाग ने इन ठेकों की न्यूनतम कीमत निर्धारित कर दी है, लेकिन अधिक बेस प्राइस के चलते कारोबारियों ने अब तक इनमें खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
शनिवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कर एवं आबकारी विभाग की समीक्षा बैठक हुई थी, जिसमें यह फैसला लिया गया कि बड़ी यूनिट्स की जगह अब व्यक्तिगत ठेके नीलाम किए जाएं। सरकार ने चेताया है कि अगर इस नीलामी में भी इच्छुक कारोबारी आगे नहीं आए, तो हिमाचल एग्रो इंडस्ट्री कॉरपोरेशन, हिमफेड और एसआईडीसी जैसे राज्य निगमों के माध्यम से शराब बिक्री की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
प्रदेश में कुल लगभग 2100 शराब ठेके हैं, जिनमें से 441 अब भी बिकने बाकी हैं। सरकार का मानना है कि ठेकों की ऊंची बेस प्राइस इनके न बिक पाने का मुख्य कारण है। इसी वजह से नीलामी की समयसीमा पहले भी बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन संतोषजनक परिणाम न मिलने के चलते अब यह मामला मंत्रिमंडल के समक्ष लाया गया है।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए शराब कारोबार से 2800 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में यदि ये ठेके नहीं बिके, तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और कारोबारियों को अधिक अवसर देने के लिए सरकार अब एक-एक यूनिट की बोली प्रणाली अपना रही है।