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पहली कक्षा से शुरू होगी नैतिक शिक्षा, CBSE स्कूलों के लिए 600 JBT की भर्ती में तेजी के निर्देश

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्रारंभिक कक्षाओं से ही नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में पहली कक्षा से नैतिक शिक्षा शुरू करने पर जोर दिया। इसके साथ सरकारी स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारियों, 600 JBT की भर्ती और 3,900 शिक्षकों सहित 900 गैर-शिक्षक कर्मचारियों के पद भरने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।

शिमला

पहली कक्षा से बच्चों को दी जाएगी नैतिक शिक्षा

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिक्षा व्यवस्था में शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से नैतिक मूल्यों, अनुशासन, करुणा, बड़ों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने पहली कक्षा से नैतिक शिक्षा शुरू करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे पढ़ाई के साथ उनमें सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों की समझ भी विकसित हो।

सरकारी स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा

बैठक में सरकारी स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में अब तक हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि केवल पाठ्यक्रम में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित स्कूलों में योग्य शिक्षकों और पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने CBSE स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाने पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए आवश्यक मानव संसाधन और अन्य व्यवस्थाएं समय रहते पूरी की जाएं।

CBSE स्कूलों के लिए 600 JBT पदों पर भर्ती होगी तेज

मुख्यमंत्री ने CBSE स्कूलों में JBT के 600 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। सरकार की योजना के तहत इन पदों को भरकर प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही 100 नए स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन स्कूलों में शैक्षणिक स्टाफ की जरूरत को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो।

मिनिस्टीरियल और चतुर्थ श्रेणी स्टाफ की जरूरत भी होगी पूरी

स्कूलों में केवल शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सहायक कर्मचारियों की उपलब्धता पर भी बैठक में चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने 100 नए स्कूलों में जरूरत के अनुसार मिनिस्टीरियल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इससे स्कूलों में शैक्षणिक कार्यों के साथ कार्यालय और अन्य व्यवस्थाओं के संचालन के लिए आवश्यक स्टाफ उपलब्ध करवाने का रास्ता साफ होगा। विभाग को संबंधित स्कूलों की जरूरत के आधार पर कर्मचारियों की व्यवस्था करने को कहा गया है।

3,900 शिक्षक और 900 गैर-शिक्षक पद भरने की प्रक्रिया की समीक्षा

शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए प्रस्तावित नई योजना की प्रगति भी बैठक का प्रमुख विषय रही। मुख्यमंत्री ने इस योजना के तहत 3,900 शिक्षकों और 900 गैर-शिक्षक कर्मचारियों, यानी कुल 4,800 पदों को भरने की प्रक्रिया की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भर्ती और स्टाफ की तैनाती से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। सरकार का फोकस स्कूलों में आवश्यक शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने पर है।

शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और मूल्यों दोनों पर फोकस

बैठक में दिए गए निर्देशों में एक तरफ पहली कक्षा से नैतिक शिक्षा के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, करुणा, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को विकसित करने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ CBSE पाठ्यक्रम वाले सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षक और अन्य स्टाफ उपलब्ध करवाने की तैयारियों को आगे बढ़ाने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को इन सभी पहलुओं पर समन्वित तरीके से काम करने के निर्देश दिए, ताकि सरकारी स्कूलों में पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे में किए जा रहे बदलावों के साथ आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सके।