लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

राज्य में निर्मित 38 दवाइयाँ मानक गुणवत्ता से बाहर पाई गईं

हिमाचलनाउ डेस्क | 25 जनवरी 2025 at 8:57 am

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

केंद्रीय दवा नियामक द्वारा जारी की गई मासिक चेतावनी में राज्य के विभिन्न दवा क्लस्टरों में निर्मित 38 दवा नमूने मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। ये नमूने उन 135 दवाओं में शामिल हैं जिन्हें विभिन्न राज्यों से मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं माना गया है। इस लेख में हम इन दवाइयों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे और यह समझेंगे कि यह समस्या क्यों उत्पन्न हुई है।

केंद्रीय सूची में शामिल 16 दवाइयाँ और राज्य सूची में 22 दवाइयाँ

इन 38 दवाइयों में से 16 दवाइयाँ केंद्रीय दवाइयों के मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की सूची में हैं, जबकि बाकी 22 दवाइयाँ विभिन्न राज्य सूची में शामिल हैं। ये दवाइयाँ कुल 29 दवा कंपनियों द्वारा बनाई गई हैं जो बड्डी, बरोटीवाला, नलागढ़, पौंटा साहिब, काला अंब और सोलन जैसे प्रमुख दवा उद्योग क्षेत्रों से संबंधित हैं।

नियमित निगरानी और चेतावनी प्रक्रिया

राज्य में दवाइयों की गुणवत्ता की निगरानी एक नियमित प्रक्रिया के तहत की जाती है। दवाइयों के नमूने बिक्री और वितरण बिंदुओं से एकत्र किए जाते हैं, उनके विश्लेषण के बाद मासिक रूप से CDSCO पोर्टल पर प्रकाशित किए जाते हैं ताकि सभी संबंधित पक्षों को इस बात की जानकारी दी जा सके कि कौन सी दवाइयाँ मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हैं।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

नष्ट हुई गुणवत्ता के कारण

इस सूची में शामिल दवाइयाँ विभिन्न प्रकार की हैं, जिनमें खांसी की सिरप, इंजेक्शंस, एनेस्थेटिक्स जेल और माउथवॉश शामिल हैं। इन दवाइयों में कुछ खतरनाक सामग्री जैसे कण पाए गए हैं, जो रोगियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अस्से सामग्री की कमी भी दवाओं की गुणवत्ता नष्ट होने का एक कारण रही है। उदाहरण के लिए:

  • आयरन सक्रोज़ इंजेक्शन में आयरन की कमी पाई गई, जो आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया के उपचार में इस्तेमाल होता है।
  • डेक्सामेथासोन इंजेक्शन, जो गंभीर एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है, में भी उचित अस्से की कमी थी।

विशेष दवाइयाँ जो गुणवत्ता से बाहर पाई गईं

यहां कुछ दवाइयाँ हैं जो चेतावनी सूची में शामिल हैं:

  • मेरोपेनम और रेबेप्राजोल (इंजेक्शंस)
  • बोरटेज़ोमिब (ऊपरी श्वसन एलर्जी के लिए उपयोगी)
  • दिवलप्रोएक्स विस्तारित रिलीज़ टैबलेट्स (वजन में असमानता पाई गई)
  • मैनोफेक्स-180 टैबलेट, एलबेंडाजोल, ग्लाइमेपिराइड टैबलेट, पैरासिटामोल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन जैसी दवाइयाँ भी इस सूची में शामिल हैं।

इन दवाइयों का उपयोग सामान्य बीमारियों जैसे एंटी-अलर्जी, उच्च रक्तचाप, गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग, दर्द, बुखार, टाइप 2 मधुमेह, मलेरिया, अस्थमा, बैक्टीरियल संक्रमण, टॉन्सिलिटिस, साइनसाइटिस, कैल्शियम की कमी, मूत्राशय संक्रमण, त्वचा संक्रमण, पेट के संक्रमण, खांसी, अम्लता, पेट का अल्सर, और हार्टबर्न जैसी स्थितियों में किया जाता है।

क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

राज्य दवाइयों के नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि इस सूची में शामिल दवाइयों को तुरंत बाजार से वापस लिया जाएगा। इसके अलावा, क्षेत्रीय कर्मचारियों द्वारा इन दवाओं के निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन कमजोरियों के कारण दवाइयाँ मानक गुणवत्ता पर खरी नहीं उतर सकीं।

निष्कर्ष

यह चेतावनी राज्य में दवाइयों की गुणवत्ता की स्थिति को लेकर एक बड़ा संकेत है। दवाइयों की गुणवत्ता में गिरावट के कारण स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी दवाइयाँ मानक गुणवत्ता की हों। सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन इससे संबंधित सभी पक्षों को सतर्क रहने और गुणवत्ता मानकों का पालन करने की जरूरत है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]