कांगड़ा जिला के टांडा में रोबोटिक सर्जरी स्वास्थ्य क्षेत्र में नए आयाम करेगी स्थापित
प्रदेश मंत्रिमंडल ने टांडा और एआईएमएसएस चमियाणा में अत्याधुनिक मशीनरी की खरीद के लिए 56 करोड़ रुपये मंजूर किए
जिला कांगड़ा में शीतकालीन प्रवास के दौरान, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने धर्मशाला में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में एक अहम घोषणा की। उन्होंने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में एम्स दिल्ली की तर्ज पर रोबोटिक सर्जरी प्रणाली स्थापित करने के लिए 28 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी।
यह पहल जिले और पड़ोसी क्षेत्रों के हजारों मरीजों के लिए अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में मील का पत्थर साबित होगी। मंत्रिमंडल ने टांडा चिकित्सा महाविद्यालय और अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान (एआइएमएसएस) चमियाणा में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के लिए 56 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
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रोबोटिक सर्जरी से उन्नत चिकित्सा सेवाएं
रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत के बाद, टांडा मेडिकल कॉलेज और एआईएमएसएस चमियाणा में यूरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, स्त्री रोग, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी और गैस्ट्रो सर्जरी में उन्नत सर्जिकल सेवाएं दी जाएंगी। इससे कांगड़ा, शिमला और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
रोबोटिक सर्जरी से रोगों के निदान में सटीकता, शीघ्र उपचार, और न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों से संक्रमण का जोखिम कम होगा। इस तकनीक के द्वारा छोटे चीरों के साथ सर्जरी की जाती है, जिससे मरीज को दर्द कम महसूस होता है और वह जल्दी ठीक होकर अपने घर लौट सकता है।
सर्जन के लिए भी लाभकारी तकनीक
इस नई तकनीक से सर्जन को भी विशेष लाभ होगा। वे अधिक निपुणता और सुरक्षा के साथ जटिल प्रक्रियाओं को करने में सक्षम होंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा।
मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह पहल प्रदेश के लोगों को नवीनतम चिकित्सा तकनीक तक पहुंच उपलब्ध कराने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। टांडा और चमियाणा के स्वास्थ्य संस्थान प्रदेश में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले केंद्र के रूप में उभरेंगे और इस क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेंगे।
राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार
मुख्यमंत्री ने बताया कि हर साल करीब 9.5 लाख मरीज उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाते हैं, जिससे राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1,350 करोड़ रुपये का वार्षिक नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि मरीजों का समय और धन बचाया जा सके।
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