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अतिक्रमण करने वाले परिवारों पर सख्ती, अब बहुएं भी नहीं लड़ सकेंगी पंचायत चुनाव

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले सरकार ने अतिक्रमण को लेकर बड़ा कानूनी बदलाव किया है। नए संशोधन के तहत सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले परिवारों की बहुएं भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होंगी। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले आए इस फैसले से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

शिमला

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से ठीक पहले सुक्खू सरकार ने बड़ा कानूनी बदलाव करते हुए अतिक्रमण करने वाले परिवारों पर शिकंजा और कस दिया है। अब यदि किसी परिवार ने सरकारी, वन या शामलात भूमि पर कब्जा किया है तो उस परिवार की बहू भी पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेगी।राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को भेजे गए हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2026 को मंजूरी मिलने के बाद यह नया प्रावधान लागू हो गया है। खास बात यह है कि 7 मई से पंचायत चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है और उससे ठीक पहले इस संशोधन ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

अब तक पंचायती राज अधिनियम में परिवार की परिभाषा में दादा-दादी, माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा-बेटी और अविवाहित बेटी शामिल थे, लेकिन पुत्रवधू का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इसी कानूनी कमी का फायदा उठाकर कई जगह अतिक्रमण करने वाले परिवार अपनी बहुओं को चुनाव मैदान में उतार देते थे।सरकार ने अब संशोधन कर परिवार की परिभाषा में बहू को भी शामिल कर लिया है। नए नियम के तहत यदि ससुराल पक्ष द्वारा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो संबंधित बहू पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य मानी जाएगी।

चुनाव आयोग की ओर से पहले भी सरकार को इस संबंध में सुझाव दिया गया था। आयोग का तर्क था कि कई मामलों में अतिक्रमणकारी परिवार चुनावी पात्रता बचाने के लिए बहुओं को आगे कर देते हैं।इसके साथ ही नामांकन जांच के दौरान अब नो-इन्क्रोचमेंट सर्टिफिकेट लेना भी अनिवार्य होगा। राजस्व विभाग की जांच में यदि परिवार द्वारा अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नामांकन रद्द किया जा सकेगा।

इस फैसले के बाद प्रदेश की 3758 ग्राम पंचायतों में चुनावी समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं विपक्ष और महिला संगठनों ने इस संशोधन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में बहू का अतिक्रमण से सीधा संबंध नहीं होता, ऐसे में उसे चुनाव लड़ने से रोकना उचित नहीं है।वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कदम जरूरी था और इससे पंचायत चुनावों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

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