राजस्थान को 15.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली बेचेगा हिमाचल, चार माह में 400 करोड़ की आय का अनुमान
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राजस्थान को 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने का समझौता किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के अनुसार, इस समझौते से राज्य को आगामी चार महीनों में 400 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने चंबा जिले के चुराह विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने चुराह के चार सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने और विभिन्न पंचायतों में सड़क निर्माण के लिए आवश्यक बजट उपलब्ध करवाने की भी घोषणा की।
चंबा/चुराह
भंजराड़ू कला मंच में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और संसाधन बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि राजस्थान को बिजली बेचने के लिए तय की गई 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से अगले चार महीनों में 400 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है। सरकार ने केंद्र के समक्ष 180 मेगावाट की बैरास्यूल जलविद्युत परियोजना में निःशुल्क बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का मामला भी उठाया है।
चार स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने चुराह विधानसभा क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हिमगिरी, थल्ली, जज्जाकोठी और मारूंड को सीबीएसई से संबद्ध करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दो से तीन सीबीएसई स्कूल खोलने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार, प्रदेश में 100 से अधिक अन्य स्कूलों को भी सीबीएसई से संबद्ध करने की योजना है और मेरिट के आधार पर 2,700 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश देश में पांचवें स्थान पर पहुंचा है, जबकि वर्ष 2021 में प्रदेश 21वें स्थान पर था। उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल, सीबीएसई से संबद्ध विद्यालय, शिक्षा के उत्कृष्ट संस्थान और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश के स्थायी और मौसमी जनजातीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण तथा सुरक्षित पेयजल सुविधा सुनिश्चित किए जाने की बात भी कही गई।
वाइल्ड फ्लॉवर हॉल से 401 करोड़ मिलने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2003 से लंबित वाइल्ड फ्लॉवर हॉल शिमला मामले में प्रभावी कानूनी पैरवी के बाद राज्य सरकार को 401 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने बताया कि अब ई-नीलामी के माध्यम से इस संपत्ति से प्रदेश को हर वर्ष लगभग 37 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। उनके अनुसार, पिछले 23 वर्षों में इस संपत्ति से प्रदेश को कोई राजस्व नहीं मिला था और अब इससे होने वाली आय को जनहित के कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कच्ची हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं के लिए 80 रुपये और मक्की के लिए 50 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। उन्होंने बताया कि गाय के दूध का समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने इन कदमों को ग्रामीण परिवारों की आय मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा बताया।
अगले माह योजना शुरू करने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अगले माह से ‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ शुरू करेगी। इसके तहत गरीब परिवारों की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। लाभार्थियों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और स्वास्थ्य बीमा कार्ड के माध्यम से निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने की बात भी कही गई। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना से चुराह विधानसभा क्षेत्र की लगभग 15 हजार महिलाएं लाभान्वित होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद सरकार संसाधन सृजन और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया है और प्राकृतिक आपदा के बाद घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता भी अभी तक प्रदेश को नहीं मिली है। कार्यक्रम में विधायक नीरज नैय्यर, पूर्व मंत्री आशा कुमारी, पूर्व विधायक सुरेंद्र भारद्वाज, जिला परिषद अध्यक्ष रेखा ठाकुर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।