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हिमाचल सरकार की नई रोड सेफ्टी ऑडिट नीति लागू, सभी सड़क परियोजनाओं की होगी चरणबद्ध सुरक्षा जांच

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मृत्यु के मामलों में कमी दर्ज होने के बाद राज्य सरकार ने सड़क सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए रोड सेफ्टी ऑडिट नीति लागू करने का निर्णय लिया है। नई नीति के तहत लोक निर्माण विभाग की सभी सड़क परियोजनाओं का विभिन्न चरणों में सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा, ताकि संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।

शिमला

सड़क सुरक्षा के लिए लागू होगी नई ऑडिट नीति

हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आने वाली सभी सड़क परियोजनाओं के लिए रोड सेफ्टी ऑडिट नीति लागू करने को मंजूरी प्रदान की है। सरकार का उद्देश्य सड़क निर्माण और रखरखाव की प्रत्येक प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देना तथा दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम करना है। नई नीति के तहत परियोजनाओं की योजना से लेकर सड़क के संचालन तक प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण में स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा, जिससे तकनीकी कमियों और संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर उन्हें दूर किया जा सके।

दुर्घटनाओं और मौतों में दर्ज हुई कमी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में प्रदेश में 2,253 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 2,107 रह गई, जो लगभग 6.48 प्रतिशत की कमी दर्शाती है। इसी अवधि में सड़क दुर्घटनाओं में 892 लोगों की मृत्यु के मुकाबले वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 806 रह गई। वहीं घायलों की संख्या भी 3,449 से घटकर 3,290 दर्ज की गई। सरकार का कहना है कि सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और जागरूकता से जुड़े प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव इन आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

पांच चरणों में होगा रोड सेफ्टी ऑडिट

नई नीति के तहत प्रत्येक सड़क परियोजना का सुरक्षा ऑडिट पांच चरणों में किया जाएगा। इनमें प्रारंभिक व्यवहार्यता एवं डिजाइन, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), निर्माण कार्य के दौरान निरीक्षण, सड़क को यातायात के लिए शुरू करने से पहले अंतिम ऑडिट तथा पहले से संचालित सड़कों का समय-समय पर सुरक्षा मूल्यांकन शामिल रहेगा। प्रत्येक चरण में सड़क की डिजाइन, मोड़, चौराहे, संकेतक, सड़क चिह्न, प्रकाश व्यवस्था, पैदल यात्रियों की सुविधाएं, सुरक्षा अवरोधक तथा यातायात प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की तकनीकी समीक्षा की जाएगी।

प्रमाणित ऑडिटर ही करेंगे सुरक्षा मूल्यांकन

नीति के अनुसार सड़क सुरक्षा ऑडिट केवल भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) से प्रमाणित रोड सेफ्टी ऑडिटर या ऐसे विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी करेंगे जिन्होंने 15 दिन का प्रमाणन प्रशिक्षण पूरा किया हो और पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव हो। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया गया है कि ऑडिटर पूरी तरह स्वतंत्र होंगे और जिस परियोजना का ऑडिट करेंगे, उसके निर्माण या संचालन से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होगा।

लोक निर्माण विभाग में बनेगा रोड सेफ्टी सेल

नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में एक समर्पित रोड सेफ्टी सेल स्थापित किया जाएगा। यह सेल सुरक्षा ऑडिट की निगरानी, प्रमाणित ऑडिटरों का पैनल तैयार करने, अनुपालन रिपोर्टों की समीक्षा करने तथा अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन करेगा। इसके अलावा अभियंता-प्रमुख प्रत्येक तीन महीने में नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। सरकार ने यह भी तय किया है कि एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में कुल परियोजना लागत का एक प्रतिशत हिस्सा सड़क सुरक्षा ऑडिट पर व्यय किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, सक्षम और टिकाऊ बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सड़क परियोजना में मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उनके अनुसार स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट व्यवस्था से परियोजनाओं में जवाबदेही बढ़ेगी, सुरक्षा मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा तथा सड़क अवसंरचना के विकास के साथ सुरक्षित यातायात व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।