बड़ा भंगाल में मोबाइल टावर लगाने की तैयारी तेज, BSNL से मांगा विस्तृत लागत अनुमान
कांगड़ा जिले के दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध करवाने के लिए मोबाइल टावर स्थापित करने की प्रक्रिया को फिर से आगे बढ़ाया जाएगा। उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने 21 सितंबर को बीएसएनएल के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में वर्ष 2024 में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर प्रक्रिया पुनः शुरू करने और आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।
कांगड़ा/धर्मशाला
हेलीकॉप्टर से सामग्री पहुंचाने का खर्च भी होगा शामिल
उपायुक्त ने बीएसएनएल को प्रस्तावित मोबाइल टावर की स्थापना के लिए विस्तृत लागत अनुमान उपलब्ध करवाने को कहा है। इसमें टावर, आवश्यक उपकरण और अन्य सामग्री की लागत के साथ बड़ा भंगाल तक हेलीकॉप्टर के माध्यम से सामग्री एवं उपकरण पहुंचाने पर होने वाले परिवहन खर्च को भी शामिल किया जाएगा।
स्वीकृतियों के लिए सरकार को भेजा जाएगा मामला
बीएसएनएल से लागत अनुमान और आवश्यक तकनीकी विवरण मिलने के बाद मामला राज्य सरकार के समक्ष आवश्यक स्वीकृतियों और वित्तीय प्रावधान के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों और जरूरी अनुमोदनों के आधार पर मोबाइल टावर स्थापित करने के काम को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
इसी वर्ष काम शुरू करवाने का प्रयास
जिला प्रशासन चालू वर्ष के दौरान ही मोबाइल टावर का काम शुरू करवाने की संभावनाओं पर प्रयास करेगा। हालांकि इसके लिए आवश्यक तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां मिलना जरूरी होगा।
आपदा के दौरान भी महत्वपूर्ण होगी मोबाइल कनेक्टिविटी
दूरस्थ और दुर्गम बड़ा भंगाल में मोबाइल नेटवर्क को संचार सुविधा के साथ आपदा प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया, राहत एवं बचाव कार्यों और प्रशासनिक समन्वय के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। मानसून और अन्य आपदा की परिस्थितियों में बेहतर संचार व्यवस्था से स्थानीय लोगों, प्रशासन और बचाव दलों के बीच त्वरित संपर्क स्थापित करने में मदद मिलेगी।
2024 में हुआ था मोबाइल टावर के लिए सर्वे
बीएसएनएल के वरिष्ठ महाप्रबंधक डॉ. विपिन मोर्य ने बैठक में बताया कि वर्ष 2024 में बड़ा भंगाल में मोबाइल टावर स्थापित करने की संभाव्यता को लेकर सर्वेक्षण किया गया था। क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सामग्री एवं उपकरणों की आवाजाही से जुड़ी व्यावहारिक तथा लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण टावर स्थापना की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।