हिमाचल में 5 मेगावॉट से बड़े सोलर प्रोजेक्ट के लिए धारा 118 में रियायत पर विचार
Himachalnow / शिमला
हिमाचल प्रदेश में 5 मेगावॉट से अधिक क्षमता वाले सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने में भूमि से जुड़े नियम प्रमुख बाधा बन रहे हैं, क्योंकि 150 बीघा से अधिक भूमि के लिए धारा 118 के तहत अनुमति आवश्यक है। ऊर्जा विभाग ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए रियायत देने संबंधी प्रस्ताव सरकार को भेजा है, ताकि निजी निवेश को प्रोत्साहन मिल सके और सौर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार संभव हो।
शिमला
बबड़े सोलर प्रोजेक्ट में भूमि सीमा प्रमुख बाधा
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए 5 मेगावॉट और उससे अधिक क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया है। हालांकि, इस दिशा में भूमि से जुड़े प्रावधान प्रमुख चुनौती के रूप में सामने आए हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार 5 मेगावॉट तक की परियोजनाओं के लिए लगभग 150 बीघा भूमि की आवश्यकता होती है, जिसे लैंड सीलिंग एक्ट के तहत स्वीकृति मिल जाती है। इसके विपरीत 6 मेगावॉट या उससे अधिक क्षमता के प्रोजेक्ट के लिए 150 बीघा से अधिक भूमि की आवश्यकता होती है, जिसके लिए धारा 118 के अंतर्गत अनुमति अनिवार्य हो जाती है।
धारा 118 के कारण निवेश पर प्रभाव
धारा 118 के तहत बाहरी निवेशकों के लिए भूमि खरीद पर प्रतिबंध लागू होने के कारण बड़े सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने में कठिनाई हो रही है। इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित हो सकती है, जबकि राज्य सरकार सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है। वर्तमान स्थिति में बड़े प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने हेतु नीति स्तर पर स्पष्ट प्रावधान की आवश्यकता बताई जा रही है।
ऊर्जा विभाग ने सरकार को भेजा प्रस्ताव
ऊर्जा निदेशालय को अब तक 7 सोलर प्रोजेक्ट से संबंधित आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इन आवेदनों के आधार पर ऊर्जा विभाग ने राजस्व विभाग को पत्र लिखकर 150 बीघा से अधिक भूमि की आवश्यकता वाले प्रोजेक्टों के लिए संभावित रियायतों पर विचार करने का अनुरोध किया है। यह मामला अब राज्य सरकार के समक्ष विचाराधीन है, जहां नीति में आवश्यक संशोधन या विशेष अनुमति पर निर्णय लिया जा सकता है।
सरकारी एजेंसियों को पहले से रियायत
वर्तमान में सरकारी क्षेत्र की एजेंसियों जैसे पावर कॉर्पोरेशन और हिमऊर्जा को धारा 118 से छूट प्राप्त है। इन एजेंसियों को 150 बीघा से अधिक भूमि उपयोग की अनुमति है और इनके सोलर प्रोजेक्ट बिना अतिरिक्त अनुमति के स्थापित किए जा सकते हैं। हालांकि, सरकारी क्षेत्र में सीमित परियोजनाएं ही स्थापित की जा सकती हैं, इसलिए व्यापक स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक मानी जा रही है।
मैदानी क्षेत्रों में संभावनाएं और आगे की दिशा
प्रदेश के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा जैसे मैदानी क्षेत्रों में सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने की संभावनाएं अधिक हैं। वर्तमान में 5 मेगावॉट तक के प्रोजेक्ट के लिए भूमि उपलब्ध होने के कारण छोटे और मध्यम स्तर के निवेश को बढ़ावा मिल रहा है, जबकि बड़े प्रोजेक्ट के लिए नीति निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। यदि राज्य सरकार धारा 118 के तहत रियायत प्रदान करने का निर्णय लेती है, तो सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं और बड़े पैमाने पर परियोजनाएं स्थापित की जा सकती हैं।