हिमाचल के तीर्थ स्थलों पर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट की मांग
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों और अन्य तीर्थ स्थलों पर बुजुर्गों, दिव्यांगों और शारीरिक रूप से अक्षम श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट लगाने की मांग राज्यसभा में उठाई गई है।
सांसद सिकंदर कुमार ने सदन में उठाया मुद्दा
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान सांसद सिकंदर कुमार ने इस विषय को प्रमुखता से उठाया और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राज्य के तीर्थ स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाया जाए।
📌 क्या कहा सांसद सिकंदर कुमार ने?
- हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्य है, जहां कई प्रसिद्ध मंदिर ऊंचाई पर स्थित हैं।
- इन मंदिरों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
- बुजुर्ग, दिव्यांग और शारीरिक रूप से अक्षम लोग इस कठिनाई के कारण दर्शन करने में असमर्थ होते हैं।
तीर्थ स्थलों पर एस्केलेटर और लिफ्ट की जरूरत क्यों?
🚶♂️ दुर्गम रास्ते – हिमाचल के ज्यादातर मंदिर पहाड़ियों पर बने हैं, जिससे वहां तक पहुंचना कठिन होता है।
👴 बुजुर्गों की परेशानी – उम्रदराज़ लोग इतनी ऊंचाई तक पैदल नहीं जा पाते।
♿ दिव्यांगों के लिए असुविधा – व्हीलचेयर या बैसाखी के सहारे चलने वाले लोगों के लिए सीढ़ियां बहुत बड़ी बाधा हैं।
🙏 सभी श्रद्धालुओं को समान अधिकार – हर व्यक्ति को धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने का अधिकार मिलना चाहिए।
सरकार से क्या मांग की गई?
सांसद सिकंदर कुमार ने केंद्र सरकार से इन तीर्थ स्थलों पर एस्केलेटर और लिफ्ट की व्यवस्था करने का अनुरोध किया।
📌 प्रस्तावित समाधान:
- बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएं।
- एस्केलेटर और लिफ्ट का निर्माण किया जाए ताकि तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान हो।
- श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।
निष्कर्ष
यह पहल बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए बहुत मददगार साबित हो सकती है। यदि केंद्र सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो हिमाचल के शक्तिपीठों और अन्य तीर्थ स्थलों पर सभी श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकेंगे। यह समाज के हर वर्ग के लिए समान धार्मिक अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।