हिमाचल में हिमकेयर योजना के 9 क्लेम पर रोक, सरकार ने भुगतान व्यवस्था में किया बड़ा बदलाव
Himachalnow / शिमला
हिमाचल सरकार ने हिमकेयर योजना के तहत नौ प्रकार के क्लेम पर पाबंदी लगाने का निर्णय लिया है, जिससे अस्पतालों को मिलने वाले दोहरे भुगतान को रोका जा सके। अब कई सुविधाओं के लिए क्लेम नहीं किया जा सकेगा और भुगतान वास्तविक खर्च या निर्धारित पैकेज दर के आधार पर होगा।
शिमला
सरकार का निर्णय, क्लेम प्रक्रिया में बदलाव
हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में हिमकेयर योजना से जुड़े क्लेम सिस्टम में महत्वपूर्ण संशोधन करने का निर्णय लिया है। सरकार ने पाया कि जिन सेवाओं के लिए पहले से अस्पतालों को बजट उपलब्ध कराया जा रहा है, उन्हीं सेवाओं के लिए हिमकेयर योजना के तहत अलग से भुगतान किया जा रहा था, जिससे वित्तीय भार बढ़ रहा था। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योजना के तहत नौ प्रकार के क्लेम पर रोक लगाने का निर्णय लिया है, ताकि संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
इन सेवाओं को क्लेम से किया गया बाहर
नए निर्देशों के अनुसार अस्पतालों में पंजीकरण शुल्क, सामान्य वार्ड के बेड चार्ज, नर्सिंग और बोर्डिंग शुल्क, सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, मेडिकल प्रैक्टिशनर और कंसल्टेंट की फीस, एनेस्थीसिया, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, ऑक्सीजन, ऑपरेशन थिएटर चार्ज, सर्जिकल उपकरणों की लागत, दवाइयां और ड्रग्स, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच जैसे एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन तथा अन्य लैब जांच, मरीज का भोजन और उपचार से पहले तथा डिस्चार्ज के बाद 15 दिन तक के खर्च अब हिमकेयर योजना के तहत क्लेम में शामिल नहीं किए जाएंगे। सरकार के अनुसार इन सभी मदों के लिए पहले से ही अस्पतालों को अलग से बजट उपलब्ध कराया जाता है।
भुगतान प्रणाली में नया प्रावधान लागू
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब हिमकेयर योजना के अंतर्गत क्लेम का भुगतान वास्तविक खर्च या निर्धारित पैकेज रेट, जो भी कम होगा, उसी आधार पर किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने वास्तविक व्यय से संबंधित बिल प्रस्तुत करें। जिन सेवाओं और सुविधाओं को राज्य सरकार द्वारा बजट के माध्यम से पहले ही कवर किया जा रहा है, उन्हें अब क्लेम प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
विधानसभा में भी उठा था मामला
हिमकेयर योजना से जुड़ा विषय विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी चर्चा में रहा था। इस दौरान योजना के क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और दावों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि योजना को जारी रखते हुए उसमें आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
विजिलेंस जांच जारी
सरकार ने योजना से जुड़े मामलों की जांच राज्य विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंप दी है। जांच एजेंसियों द्वारा संबंधित अस्पतालों और स्वास्थ्य बीमा सोसायटी से रिकॉर्ड मांगे गए हैं और आंतरिक ऑडिट में सामने आए मामलों की भी जांच की जा रही है।
क्या है हिमकेयर योजना
हिमकेयर योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी, जिसके तहत पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का वार्षिक कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना में एक कार्ड पर अधिकतम पांच सदस्यों को लाभ देने का प्रावधान है और यह उन परिवारों के लिए लागू की गई है जो आयुष्मान भारत योजना के दायरे में शामिल नहीं हैं।