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हिमफेड ने दूध खरीद की सीमा तय की, अब प्रति उत्पादक प्रतिदिन 20 लीटर तक होगी खरीद

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 13 Jun 2026 • 1 Min Read

प्रदेश में दूध प्रसंस्करण संयंत्रों की क्षमता से अधिक दूध पहुंचने के कारण हिमफेड ने प्रति दुग्ध उत्पादक प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध खरीदने की सीमा तय की है। निदेशक मंडल की बैठक में लिए गए इस निर्णय के तहत संबंधित इकाइयों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी रूप से लागू रहेगी और भविष्य में स्थिति की समीक्षा के आधार पर इसमें बदलाव किया जा सकता है।

शिमला

दूध खरीद पर नई सीमा लागू

हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (हिमफेड) ने दूध खरीद व्यवस्था में बदलाव करते हुए प्रति दुग्ध उत्पादक प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध खरीदने की सीमा निर्धारित की है। यह निर्णय हिमफेड के निदेशक मंडल की 16 मार्च 2026 को आयोजित बैठक में लिया गया। प्रबंधन के अनुसार हाल के महीनों में दूध संग्रहण की मात्रा लगातार बढ़ी है, जिसके चलते उपलब्ध प्रसंस्करण और भंडारण संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए दूध खरीद को संतुलित करने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है।

प्रसंस्करण क्षमता से अधिक पहुंच रही आपूर्ति

हिमफेड प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में विभिन्न दूध प्रसंस्करण संयंत्र अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक मात्रा में दूध का संचालन कर रहे हैं। दूध संग्रहण में वृद्धि के कारण संयंत्रों में प्रसंस्करण, पैकेजिंग और भंडारण से जुड़े कार्यों का दबाव बढ़ा है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों के भीतर गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना प्राथमिकता है, इसलिए दूध खरीद की मात्रा को नियंत्रित करने की आवश्यकता महसूस की गई। इसी कारण खरीद सीमा तय करने का निर्णय लिया गया ताकि संचालन व्यवस्था सुचारू रूप से जारी रह सके।

संचालन संबंधी चुनौतियां बनी वजह

प्रबंधन ने बताया कि दूध प्रसंस्करण संयंत्रों में मशीनों की नियमित सफाई और सैनिटाइजेशन के लिए निर्धारित समय उपलब्ध कराना आवश्यक होता है, लेकिन क्षमता से अधिक संचालन होने पर यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा दूध भंडारण क्षमता की सीमाएं, उपकरणों पर बढ़ता कार्यभार, रखरखाव व्यय में वृद्धि तथा नियमित मरम्मत कार्यों के लिए समय की कमी जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। अधिकारियों के अनुसार संयंत्रों की कार्यक्षमता और उत्पाद गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संचालन को उपलब्ध क्षमता के अनुरूप रखना जरूरी है।

नई समितियों से खरीद फिलहाल संभव नहीं

हिमफेड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान क्षमता सीमाओं के चलते नई पंजीकृत दुग्ध सहकारी समितियों से दूध खरीदना फिलहाल संभव नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में पहले से जुड़े दुग्ध उत्पादकों और सहकारी समितियों से प्राप्त दूध के प्रसंस्करण को प्राथमिकता दी जा रही है। दूध खरीद की सीमा तय करने का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना तथा अधिक संख्या में छोटे और सीमांत दुग्ध उत्पादकों को खरीद प्रणाली का लाभ उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन गतिविधियों को भी निरंतर समर्थन मिलता रहेगा।

इकाइयों को जारी किए गए निर्देश

हिमफेड मुख्यालय ने मंडी, कांगड़ा, दत्तनगर, नाहन और नालागढ़ इकाइयों के प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर सभी दुग्ध सहकारी समितियों, दूध उत्पादकों और अन्य संबंधित पक्षों को इस निर्णय की जानकारी दें। साथ ही खरीद सीमा लागू करने के कारणों और इसकी प्रक्रिया के बारे में भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। प्रबंधन चाहता है कि सभी हितधारकों तक निर्णय की सूचना समय पर पहुंचे ताकि खरीद व्यवस्था के संचालन में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।

व्यवस्था अस्थायी रूप से रहेगी प्रभावी

प्रबंधन ने कहा है कि दूध खरीद की यह सीमा अस्थायी व्यवस्था के रूप में लागू की गई है। हिमफेड समय-समय पर दूध संग्रहण, प्रसंस्करण क्षमता, भंडारण व्यवस्था और संचालन संबंधी परिस्थितियों की समीक्षा करेगा। यदि भविष्य में क्षमता विस्तार या संचालन स्थितियों में सुधार होता है तो खरीद सीमा पर पुनर्विचार किया जा सकता है। फिलहाल यह कदम उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और नियमित संचालन को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।