HP Shiva / हिमाचल में पहली बार मोनोरेल से होगी फलों की ढुलाई, मंडी में एक किलोमीटर लंबे ट्रैक से 85 किसान परिवारों को लाभ
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और ढलानदार बागवानी क्षेत्रों में फलों एवं दूसरी कृषि उपज की ढुलाई आसान बनाने की दिशा में नई शुरुआत हुई है। मंडी जिले के एचपी शिवा क्लस्टर पलहोता-2 में प्रदेश की पहली एचपी शिवा मोनोरेल परियोजना शुरू की गई है। करीब 20 लाख रुपये की लागत से तैयार एक किलोमीटर लंबी मोनोरेल से किसानों-बागवानों का समय और श्रम बचेगा। एशियाई विकास बैंक से वित्तपोषित 1,292 करोड़ रुपये की एचपी शिवा परियोजना की अवधि भी दो वर्ष बढ़ाकर जून 2030 कर दी गई है।
मंडी/पलहोता
20 लाख से तैयार हुई प्रदेश की पहली मोनोरेल
राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने मंडी जिले के एचपी शिवा क्लस्टर पलहोता-2 में प्रदेश की पहली एचपी शिवा मोनोरेल परियोजना का उद्घाटन किया। करीब 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस मोनोरेल की लंबाई एक किलोमीटर है।
जिस पलहोता-2 क्लस्टर में यह सुविधा विकसित की गई है, वह 28.44 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और इससे 85 किसान परिवार जुड़े हुए हैं। मोनोरेल की शुरुआत से विशेष रूप से ऐसे किसानों-बागवानों को सुविधा मिलेगी, जिन्हें ढलानदार और दुर्गम क्षेत्रों से अपनी उपज बाहर तक पहुंचाने में अधिक श्रम और समय लगाना पड़ता है।
ढलानदार क्षेत्रों से फल निकालना होगा आसान
मोनोरेल के माध्यम से फल एवं अन्य कृषि उपज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना अधिक सुगम होगा। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों में उपज की ढुलाई किसानों-बागवानों के लिए बड़ी चुनौती रहती है। नई व्यवस्था से इस काम में लगने वाले समय और श्रम को कम करने में मदद मिलेगी।
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के किसानों और बागवानों के लिए महत्वपूर्ण एवं लाभकारी साबित होगी। सरकार बागवानी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है।
सात जिलों में चल रही 1,292 करोड़ की HP Shiva परियोजना
मोनोरेल का निर्माण एचपी शिवा परियोजना के तहत किया गया है। एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना की कुल लागत 1,292 करोड़ रुपये है। इसे प्रदेश के सात जिलों बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन, सिरमौर और ऊना में क्रियान्वित किया जा रहा है।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य इससे जुड़े किसान परिवारों की आय में वृद्धि करना है। इसके तहत बागवानी क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं और तकनीक के विस्तार के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
दो साल बढ़ी परियोजना की अवधि, अब जून 2030 तक चलेगा काम
प्रदेश सरकार ने एचपी शिवा परियोजना की अवधि में भी बड़ा बदलाव किया है। किसान हित में परियोजना की समयावधि को दो वर्ष बढ़ाते हुए जून 2028 के स्थान पर अब जून 2030 तक कर दिया गया है। इससे परियोजना के तहत निर्धारित कार्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध होगा।
बागवानी मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक और आधारभूत सुविधाओं के माध्यम से किसानों की आर्थिकी मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मोनोरेल जैसी सुविधा को भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
3,000 हेक्टेयर में काम पूरा करने के लिए 28 फरवरी की डेडलाइन
एचपी शिवा परियोजना के प्रथम चरण के तहत 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सभी निर्धारित गतिविधियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ तैयार किए गए सभी क्लस्टरों का किसानों को हस्तांतरण भी सुनिश्चित किया जाना है।
इन दोनों कार्यों को पूरा करने के लिए 28 फरवरी 2027 की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की गई है। परियोजना के माध्यम से प्रदेश के बागवानी क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार कर किसानों के लिए उत्पादन से लेकर उपज की ढुलाई तक की व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।