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हिमाचल में आईआईटी मंडी का ‘मौर्या’ रोवर तैयार, अंतरराष्ट्रीय रोवर प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन की तैयारी

PRIYANKA THAKUR • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / मंडी

हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी द्वारा विकसित ‘मौर्या’ मार्स रोवर का उन्नत प्रोटोटाइप तैयार किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय रोवर प्रतियोगिताओं में प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। यह रोवर मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में परीक्षण के लिए डिजाइन किया गया है और इसकी तकनीकी क्षमता का मूल्यांकन वैश्विक मंच पर किया जाएगा।

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चार वर्षों के शोध के बाद तैयार हुआ ‘मौर्या’
आईआईटी मंडी के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं की टीम ने चार वर्षों की निरंतर मेहनत और तकनीकी विकास के बाद ‘मौर्या’ नामक मार्स रोवर का नया प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह संस्थान का दूसरा रोवर मॉडल है, जिसमें पहले मॉडल के अनुभव के आधार पर कई सुधार किए गए हैं और आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है, जिससे इसकी कार्यक्षमता और प्रदर्शन को बेहतर बनाया गया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी की तैयारी
टीम इस रोवर को यूरोपियन रोवर चैलेंज सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। इन प्रतियोगिताओं में दुनिया भर के संस्थानों के रोवर्स को मंगल ग्रह जैसी कृत्रिम परिस्थितियों में परखा जाता है, जहां उनकी कार्यक्षमता, नेविगेशन क्षमता और तकनीकी दक्षता का विस्तृत परीक्षण किया जाता है।

तकनीकी विशेषताओं से सुसज्जित रोवर
‘मौर्या’ रोवर में डिफरेंशियल ड्राइव सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे इसका संचालन सरल और प्रभावी बनता है। इसके अलावा उन्नत सस्पेंशन और ट्रैक्शन वाले पहिए इसे ऊबड़-खाबड़ सतहों पर संतुलित रूप से चलने में सक्षम बनाते हैं, जबकि हर पहिये के लिए अलग कंट्रोल यूनिट इसे बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है।

पावर सिस्टम और सुरक्षा प्रावधान
रोवर में 24 वोल्ट पावर सिस्टम लगाया गया है, जो इसकी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करता है। इसके साथ ही मास्टर किल स्विच जैसी सुरक्षा सुविधा भी जोड़ी गई है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सिस्टम को तुरंत नियंत्रित किया जा सकता है और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होता है।

लाइफ साइंस मॉड्यूल से होगा विश्लेषण
इस रोवर में उन्नत लाइफ साइंस मॉड्यूल भी शामिल किया गया है, जो मिट्टी और पर्यावरण से संबंधित डेटा का विश्लेषण करने में सक्षम है। यह मॉड्यूल वैज्ञानिक परीक्षणों में उपयोगी साबित होगा और विभिन्न परिस्थितियों में डेटा संग्रहण में सहायता करेगा।

यूआरसी में प्रस्तुति और आगे की योजना
हाल ही में टीम ने ‘मौर्या’ को यूनिवर्सिटी रोवर चैलेंज (यूआरसी) में प्रस्तुत किया था, जहां यह दूसरे चरण तक पहुंचा और सीमित अंतर से आगे नहीं बढ़ सका। अब टीम इस प्रोटोटाइप में और सुधार कर रही है, ताकि आगामी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी क्षमता प्रदर्शित की जा सके।