अवैध निर्माण मामलों पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कंपाउंडिंग लंबित होने पर नहीं काटा जा सकता पानी का कनेक्शन
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कंपाउंडिंग आवेदन लंबित होने की स्थिति में केवल अवैध निर्माण का हवाला देकर पानी का कनेक्शन नहीं काटा जा सकता। चंबा के डलहौजी से जुड़े मामले में अदालत ने अंतिम निर्णय होने तक जलापूर्ति जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही सक्षम प्राधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर कंपाउंडिंग आवेदन पर निर्णय लेने का आदेश दिया।
शिमला
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण और कंपाउंडिंग (नियमितीकरण) से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी निर्माण का मामला कंपाउंडिंग के लिए लंबित है तो केवल अवैध निर्माण का हवाला देकर पानी का कनेक्शन नहीं काटा जा सकता। अदालत ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी के अंतिम निर्णय से पहले इस तरह की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है।यह मामला चंबा जिले के डलहौजी का है, जहां हंसराज और उनके बेटे ने जल शक्ति विभाग द्वारा पानी का कनेक्शन काटने की चेतावनी को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम की धारा-39 के तहत निर्माण को नियमित करने के लिए आवेदन कर रखा था।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की एकल पीठ के समक्ष यह तथ्य आया कि सितंबर 2024 में एसडीएम डलहौजी की अध्यक्षता वाली संयुक्त निरीक्षण समिति ने निरीक्षण कर निर्माण में केवल निर्धारित 10 प्रतिशत सीमा के भीतर विचलन पाया था और नियमितीकरण की सिफारिश भी की थी। इसके बावजूद सक्षम प्राधिकारी ने अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया।इसी बीच 4 जुलाई 2026 को जल शक्ति विभाग ने अवैध निर्माण का हवाला देते हुए पानी का कनेक्शन काटने का नोटिस जारी कर दिया। हाई कोर्ट ने इस नोटिस पर रोक लगाते हुए कहा कि जब तक कंपाउंडिंग आवेदन पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक याचिकाकर्ताओं के परिसर की जलापूर्ति बंद नहीं की जा सकती।
अदालत ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को संयुक्त निरीक्षण समिति की सिफारिशों पर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय के बाद ही जल शक्ति विभाग कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। यह फैसला कंपाउंडिंग के लंबित मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई की सीमा भी स्पष्ट करता है।